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इस कारण बना सोशल मीडिया में बहस का मुद्दा
इस फरमान के आने के बाद सोशल मीडिया में बहस छिड़ गई है, क्योंकि यह फरमान सिर्फ लड़कियों के लिए ही जारी की गई है। जबकि कई छात्र इस यूनिवर्सिटी में गैर-कानून रुप से रह रहे हैं। उनके ऊपर किसी भी तरह का कई फरमान नहीं आया है।
यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने कही ये बात
यूनिवर्सिटी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि ऐसा पाया गया था कि कुछ लड़कियां अपने नाम पर अलॉट बेड पर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को सुला रही थीं। बहरहाल, ऐसा माना जा रहा है कि इस नोटिफिकेशन का असल मकसद स्पेस मैनेजमेंट और एडमिनिस्ट्रेटिव मुद्दों को हल करना है, लेकिन जिस तरह से नोटिफिकेशन में जेंडर स्पेस्फिक लैंग्वेज (लिंग भेद सरीखी भाषा) का इस्तेमाल किया गया है, उस पर विवाद खड़ा हो गया है।
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