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ट्रंप ने ईरान से जंग के बताए 5 मकसद, Hormuz की सुरक्षा से भी झाड़ा पल्ला; जानें क्या-क्या कहा

US Middle East Policy: ईरान से युद्ध के उद्देश्यों पर Donald Trump ने अपनी स्थिति को स्पष्ट किया है। साथ ही, डोनाल्ड ट्रंप ने Strait of Hormuz की सुरक्षा से किनारा करने का संकेत भी दे दिया है। पढ़ें ट्रंप का ईरान से जंग पर बयान।

Donald trump iran war- India TV Hindi
Image Source : AP डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जंग पर अपनी स्थिति साफ की है।

Iran US War: ईरान से जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने युद्ध के अपने 5 मकसद का खुलासा कर दिया है। साथ ही, ट्रंप ने Hormuz Strait की सुरक्षा करने से पल्ला झाड़ लिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि Hormuz Strait की सुरक्षा अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है, जो लोग वहां से बिजनेस करते हैं वही उसकी सुरक्षा करें। हां, अगर अमेरिकी से मदद मांगी जाएगी तो ईरान का खतरा खत्म होने तक वह ऐसा कर सकता है।

ईरान का डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस तबाह करना है मकसद

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि Middle East में चल रहे मिलिट्री ऑपरेशन को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि Iran के विरुद्ध तय किए गए ज्यादातर लक्ष्य लगभग हासिल कर लिए हैं। ट्रंप ने अपने मैसेज में 5 प्रमुख मकसद का जिक्र किया। पहला, ईरान की मिसाइल कैपेबिलिटी, लॉन्चर और उससे जुड़े सभी संसाधनों को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना। दूसरा, ईरान के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को तबाह करना।

ईरान को परमाणु क्षमता के करीब कभी ना पहुंचने देना

उनका तीसरा लक्ष्य, ईरान की नेवी और वायुसेना को नष्ट करना, जिसमें एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम भी हैं। चौथा, यह तय करना कि ईरान कभी भी परमाणु क्षमता के आसपास न पहुंच सके और अमेरिका हर हालत में तुरंत और कड़ा जवाब देने के लिए तैयार रहे। पांचवां लक्ष्य अपने सहयोगी देशों की रक्षा करना, जिनमें Israel, United Arab Emirates, Bahrain, Saudi Arabia, Qatar और Kuwait जैसे देश शामिल हैं।

Image Source : Donald Trump (Social Truth)/APडोनाल्ड ट्रंप ने अपनी मध्य-पूर्व नीति पर बयान दिया है।

Strait of Hormuz की सुरक्षा से अमेरिका ने किया किनारा

डोनाल्ड ट्रंप ने Strait of Hormuz को लेकर भी अपने रुख को साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की निगरानी करने और सुरक्षा का जिम्मा उन देशों को उठाना चाहिए, जो इसका इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, जरूरत पड़ने पर अमेरिका मदद के लिए तैयार रहेगा। लेकिन अगर ईरान से खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है, तो यह मिलिट्री ऑपरेशन अन्य देशों के लिए आसान हो जाएगा।

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