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सीजफायर वार्ता में शामिल होने पर सस्पेंस बरकरार, जानें ईरान के विदेश मंत्रालय का ताजा बयान

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम वार्ता को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। वार्ता को लेकर ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अभी बातचीत में शामिल होने का फैसला नहीं किया गया है।

Iran US Ceasefire Talks In Islamabad- India TV Hindi
Image Source : AP Iran US Ceasefire Talks In Islamabad

Iran US Ceasefire Talks: अमेरिका से संभावित संघर्ष विराम वार्ता को लेकर ईरान के विदेश मंत्रालय ने बड़ा बयान दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि उनकी सरकार ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वह सीजफायर की बातचीत में शामिल होगी या नहीं। प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने मंगलवार देर रात सरकारी टीवी को बताया कि ईरान इस बात से नाराज है कि अमेरिकियों की तरफ से उन्हें मिले-जुले संदेश मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह किसी दुविधा की वजह से नहीं है, बल्कि इसलिए है क्योंकि हमें अमेरिकी पक्ष से विरोधाभासी संदेश और व्यवहार, और अस्वीकार्य कार्रवाइयों का सामना करना पड़ रहा है।"

अभी वॉशिंगटन में हैं वेंस

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, जिन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने का अधिकार नहीं था और जिन्होंने नाम ना छापने की शर्त पर बात की। अधिकारी ने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मंगलवार सुबह व्हाइट हाउस में नीतिगत बैठकों में हिस्सा ले रहे थे। उपराष्ट्रपति के कार्यालय और व्हाइट हाउस ने मंगलवार को उन संदेशों का कोई जवाब नहीं दिया, जिनमें यह पूछा गया था कि क्या उनका अभी भी ईरान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने का इरादा है।

‘झूठे वादों के जाल में फंस गया ईरान’

सीजफायर वार्ता पर जारी सस्पेंस के बीच रूस की TASS न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि मॉस्को को अमेरिका-ईरान बातचीत में धमकियां और वादे तो दिखते हैं, लेकिन कोई ठोस तथ्य नहीं। उन्होंने कहा, “हम ईरान की स्थिति को देखते हैं जो झूठे वादों के जाल में फंस चुके हैं– जिसमें वही ‘ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन’ भी शामिल है।” यहां उनका इशारा 2015 के उस समझौते की ओर था, जो तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुआ था। इस समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के बदले उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी गई थी।

रूस रख रहा है पैनी नजर

लावरोव ने यह भी कहा कि रूस पाकिस्तान में संभावित नई बातचीत से जुड़े घटनाक्रमों का विश्लेषण कर रहा है, क्योंकि वह जानता है कि हालात 24 घंटे के भीतर 10 बार पूरी तरह से बदल सकते हैं। उन्होंने कहा, “अगर ईरानी और अमेरिकी वार्ताकारों के मौजूदा प्रयास, जिनका हम समर्थन करते हैं, 2015 के समझौते जैसा ही कोई नतीजा देते हैं, तो मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी सफलता होगी।”

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