तेहरान: ईरान पर अमेरिका-इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के एक महीना पूरे हो चुके हैं। इस बीच, ईरान के संयुक्त सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फघरी ने रविवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि अब अमेरिका और इजरायल के सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों के निजी आवास ईरान के लिए 'वैध लक्ष्य' बन चुके हैं।
"ईरानी नागरिकों के घरों को बनाया गया निशाना"
ईरान की ओर से आई यह धमकी सीधे तौर पर उन अधिकारियों के लिए है जो इस समय मिडिल ईस्ट और इजरायल में तैनात या रह रहे हैं। प्रवक्ता जोल्फघरी ने कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया है, क्योंकि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के विभिन्न शहरों में ईरानी नागरिकों के आवासीय घरों को निशाना बनाया है।
इससे पहले, ईरान ने अमेरिका को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि उसने जमीनी आक्रमण करने की हिमाकत की, तो अमेरिकी सैनिकों को "आग के हवाले" कर दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य तैनाती देखी जा रही है।
अमेरिकी-इजराइली विश्वविद्यालय भी निशाने पर
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने अमेरिका और इजरायल की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांति वार्ता केवल एक दिखावा है, जबकि अमेरिका लगातार क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेज रहा है। इस बीच, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने पहली बार शिक्षण संस्थानों को युद्ध के दायरे में लाते हुए एक बयान जारी किया।
ईरान ने क्षेत्र में स्थित अमेरिकी और इजराइली विश्वविद्यालयों को सीधे तौर पर निशाना बनाने की धमकी दी है। IRGC ने अमेरिका को 30 मार्च दोपहर 12 बजे तक का समय दिया है कि वह ईरानी विश्वविद्यालयों पर हो रहे हमलों की आधिकारिक निंदा करे और इजरायल को ऐसे हमलों से रोके।
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