अंकारा: सीरिया में इस हफ्ते इजरायल की ओर से किए गए एयरस्ट्राइक को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिका के सीरिया के लिए विशेष दूत और तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बराक ने कहा है कि इजरायल ने मंगलवार को उत्तरी सीरिया के अबू दुहूर एयरबेस पर हमला करने से पहले अमेरिका को इसकी जानकारी नहीं दी थी। खास बात यह है कि इस हमले से इजरायल और NATO सदस्य तुर्की के बीच सीधे टकराव का खतरा पैदा हो गया था। हमले में एयरबेस को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। बराक के मुताबिक, यह हमला तुर्की को उकसाने की कोशिश भी हो सकता था और यही इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू है।
इजरायल ने एयरबेस पर हमला क्यों किया?
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर ने हमले के बाद कहा कि अबू दुहूर एयरबेस को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि सीरिया कथित तौर पर एक समझौते का उल्लंघन करने के करीब था। इजरायल का आरोप था कि सीरिया इस एयरबेस पर तुर्की के सैनिकों की तैनाती की इजाजत देने जा रहा था। बराक ने कहा कि संभव है कि इजरायल के पास ऐसी खुफिया जानकारी हो, जिससे उसे लगा हो कि तुर्की इस इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा,
'संभव है कि मैदान में मौजूद किसी कमांडर ने यह फैसला किया हो कि हम ऐसा नहीं होने देंगे। लेकिन उन्होंने जो नहीं किया, वह था हमें या तुर्की को इसकी जानकारी देना।'
बराक ने यह संभावना भी जताई कि इजरायल की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी के बीच गलतफहमी भी हमले की एक वजह हो सकती है।
तुर्की के साथ सीधा टकराव कितना करीब था?
अबू दुहूर एयरबेस तुर्की की सीमा से करीब 80 किलोमीटर दूर है। बराक ने बताया कि इस वजह से हालात बेहद संवेदनशील हो गए थे। उन्होंने कहा,
'जब तुर्की की सेना इन विमानों को अपनी सीमा की ओर आते देखती है और उसे उनके मकसद, दिशा या इरादे के बारे में पता नहीं होता, तो वह सोचने लगती है कि हमें भी अपने लड़ाकू विमान तैयार करने होंगे।'
बराक ने याद दिलाया कि तुर्की पहले भी सीरिया की सीमा के पास रूस के लड़ाकू विमान को गिरा चुका है। 2015 में तुर्की ने सीरियाई सीमा के पास एक रूसी विमान को मार गिराया था। ऐसे में इस बार भी गलतफहमी की वजह से हालात गंभीर हो सकते थे। बराक की ये टिप्पणियां शुक्रवार देर रात लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी मारियो नवफल ने X पर साझा कीं।
हमले से पहले एयरबेस गए थे तुर्की के अधिकारी
इस मामले में एक और अहम जानकारी सामने आई है। 2 सीरियाई अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तुर्की का एक प्रतिनिधिमंडल एयरस्ट्राइक से एक दिन पहले अबू दुहूर एयरबेस पहुंचा था। अधिकारियों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया के इदलिब प्रांत में स्थित एयरबेस पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा लिया था। बराक ने कहा कि इजरायल ने एयरबेस पर तुर्की की सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, अमेरिका ने जांच के बाद निष्कर्ष निकाला था कि वहां ऐसी गतिविधि 'नहीं हो रही थी।' उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा,
'किसी गलती के अनचाहे नतीजे बेहद गंभीर हो सकते हैं।'
सीरिया की सेना को मजबूत कर रहा है तुर्की
तुर्की सीरिया की सेना के पुनर्निर्माण में मदद कर रहा है। इसके तहत वह सीरियाई सैनिकों को ट्रेनिंग देने के साथ-साथ उपकरण और लॉजिस्टिक सहायता भी मुहैया करा रहा है। दोनों देशों ने पिछले साल एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे उनकी सैन्य साझेदारी को औपचारिक रूप दिया गया। तुर्की के अधिकारी कई बार कह चुके हैं कि अंकारा सीरिया की सुरक्षा को अपनी सुरक्षा से अलग नहीं मानता। यही वजह है कि सीरिया में तुर्की की बढ़ती सैन्य भूमिका को लेकर इजरायल की चिंता बढ़ी हुई है।
इजरायल को सीरिया की नई सरकार पर भरोसा नहीं
इजरायल सीरिया की नई सरकार को लेकर पहले से ही सतर्क है। दमिश्क में सत्ता संभालने वाले नए अधिकारियों का नेतृत्व ऐसे पूर्व इस्लामी विद्रोहियों के हाथ में है, जिन पर इजरायल को भरोसा नहीं है। सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा कई बार कह चुके हैं कि वह इजरायल के साथ युद्ध नहीं चाहते। इसके बावजूद सीरिया में इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रही है। 2024 के अंत में बशर अल-असद की सरकार गिरने के बाद से इजरायल ने सीरिया के अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों हवाई हमले किए हैं। इजरायली सेना ने दक्षिणी सीरिया में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाले बफर जोन पर भी नियंत्रण कर लिया था और वह अब भी इस इलाके पर कब्जा किए हुए है।
तुर्की-इजरायल के रिश्तों में और बढ़ा तनाव
तुर्की ने हाल ही में सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता किया है। हालांकि, अबू दुहूर एयरबेस पर इजरायली हमले के बाद अंकारा की ओर से सैन्य जवाब देने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। फिर भी इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण तुर्की-इजरायल संबंधों पर दबाव और बढ़ा दिया है। पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि सीरिया में इजरायल और तुर्की की सैन्य गतिविधियां अब एक-दूसरे के बेहद करीब आ गई हैं। अमेरिका के अपने विशेष दूत का यह कहना कि इजरायल ने हमले से पहले न तो अमेरिका और न ही तुर्की को जानकारी दी, इस तनाव को और गंभीर बना देता है। (AP से इनपुट्स के साथ)
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