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जानिए दुनिया के सबसे बड़े हिन्दू मंदिर का इतिहास, कहानी और रोचक तथ्य

भारत मंदिरों का देश है। यहां छोटे-बड़े लाखों मंदिर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर कहां है। चलिए हम आपको बताते हैं कि भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर किस देश में हैं।

Cambodia Angkor Wat Temple- India TV Hindi
Image Source : AP Cambodia Angkor Wat Temple

Cambodia Angkor Wat Temple: भारत की सांस्कृतिक विरासत में मंदिरों का बेहद खास महत्व है। ये केवल पूजा-अर्चना के स्थल ही नहीं, बल्कि कला, स्थापत्य, विज्ञान और समाज की आस्था के प्रतीक भी हैं। जब हम दुनिया के सबसे बड़े हिन्दू मंदिर की बात करते हैं, तो सामने आता है अंकोरवाट मंदिर का नाम जो कंबोडिया में स्थित है। यह मंदिर ना केवल हिन्दू धर्म की महानता का प्रतीक है, बल्कि वास्तुकला और मानवीय श्रम का अद्वितीय उदाहरण भी है। आइए जानते हैं इस मंदिर की कहानी, इतिहास और रोचक तथ्य।

अंकोरवाट मंदिर का इतिहास

अंकोरवाट मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी की शुरुआत में हुआ था। कंबोडिया के राजा सूर्यवर्मन द्वितीय (1113–1150 ई) ने इस विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है इसे उस समय राज्य मंदिर तथा राजधानी के रूप में स्थापित किया गया था। राजा सूर्यवर्मन द्वितीय चाहते थे कि उनका साम्राज्य दिव्यता, शक्ति और धर्म का केंद्र बने। इसीलिए उन्होंने उन्होंने इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया, जो ना केवल पूजा का स्थल था बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक भी। 13वीं शताब्दी के बाद जब कंबोडिया में बौद्ध धर्म का प्रभाव बढ़ा तो अंकोरवाट भी इससे अछूता नहीं रहा। आज यहां हिंदू और बौद्ध दोनों आस्थाओं का संगम देखने तको मिलता है।

Image Source : apCambodia Angkor Wat Temple

मंदिर की स्थापत्य कला

अंकोरवाट मंदिर का निर्माण खमेर वास्तुकला के उत्कर्ष का प्रतीक है। यह मंदिर लगभग 162.6 हेक्टेयर (402 एकड़) भूमि में फैला हुआ है, जो इसे विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक परिसर बनाता है। मंदिर को 5 ऊंचे शिखरों के साथ बनाया गया है। ये शिखर पंचमुखी मेरु पर्वत का प्रतीक हैं, जिसे हिन्दू धर्म में देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। मंदिर की दीवारों पर रामायण और महाभारत के अद्भुत दृश्य अंकित हैं। विशेषकर समुद्र मंथन की कथा का भव्य चित्रण देखने योग्य है। मंदिर की दीवारों पर अप्सराओं और देवताओं की लगभग 1,500 से अधिक मूर्तियां बनी हुई हैं। ये मूर्तियां इतनी बारीकी से तराशी गई हैं कि आज भी लोग इनके कौशल पर हैरान रह जाते हैं। मंदिर के चारों ओर विशाल खाई बनाई गई है जो सुरक्षा और सौंदर्य दोनों का प्रतीक है।

अंकोरवाट मंदिर की कहानी

हिन्दू पुराणों में सृष्टि का केंद्र मेरु पर्वत माना गया है। अंकोरवाट मंदिर उसी दिव्य पर्वत की कल्पना पर आधारित है। ऐसा कहा जाता है कि राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने मंदिर का निर्माण इस विश्वास के साथ कराया था कि मृत्यु के बाद उन्हें भगवान विष्णु का धाम प्राप्त होगा। मंदिर की दीवारों पर समुद्र मंथन की विशाल कलाकृति बनी हुई है, जिसमें देव और दानव अमृत प्राप्त करने के लिए नाग वासुकी की रस्सी से समुद्र मंथन करते दिखाई देते हैं। यह दृश्य ना केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि उस समय की कलात्मकता का अद्भुत उदाहरण भी है।

मंदिर का वर्तमान स्वरूप

आज अंकोरवाट मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) में शामिल है। हर साल लाखों पर्यटक और श्रद्धालु यहां आते हैं। यह मंदिर ना केवल कंबोडिया का गौरव है, बल्कि उसकी पहचान भी है। इतना ही नहीं, कंबोडिया के राष्ट्रीय ध्वज पर भी अंगकोर वाट की आकृति बनी हुई है, जो इसकी महत्ता को और बढ़ा देती है।

Image Source : apCambodia Angkor Wat Temple

अंकोरवाट मंदिर के रोचक तथ्य

  • विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल: अंकोरवाट मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है।
  • निर्माण सामग्री: इस मंदिर के निर्माण में लाखों बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल हुआ, जिन्हें 50 किलोमीटर दूर से हाथी, नाव और लकड़ी के ठेलों के सहारे लाया गया था।
  • समय के मात दे रहा मंदिर: 900 साल पुराना यह मंदिर आज भी मजबूती से खड़ा है, जबकि कई हिस्से जंगलों और युद्धों से प्रभावित हो चुके हैं।
  • पूर्व से पश्चिम की ओर मुख: अधिकांश हिन्दू मंदिर पूर्व की ओर बने होते हैं, लेकिन अंकोरवाट मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम की ओर है। विद्वानों का मानना है कि यह भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण ऐसा किया गया।
  • अप्सराओं की अद्भुत मूर्तियां: मंदिर की दीवारों पर करीब 3,000 अप्सराओं की मूर्तियां हैं, जिनकी अलग-अलग मुद्राएं और आभूषण विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
  • बौद्ध और हिन्दू संगम: आज यह मंदिर बौद्ध धर्म का प्रमुख स्थल है, लेकिन इसकी जड़ें हिन्दू परंपरा में हैं। इसीलिए यहां दोनों धर्मों की झलक दिखाई देती है।
  • पर्यटन का केंद्र: अंकोरवाट मंदिर हर साल करीब 25 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करता है। दुनिया के हर कोने से लोग इसकी भव्यता और सुंदरता को निहारने आते हैं।

सांस्कृतिक महत्व

अंकोरवाट मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह मानव सभ्यता की महान उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि किस तरह प्राचीन समय में लोग ना केवल आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्ध थे, बल्कि विज्ञान और वास्तुकला में भी अद्वितीय थे। भारतीय संस्कृति का प्रभाव कंबोडिया पर सदियों से रहा है और अंकोरवाट मंदिर उसी का जीवंत प्रमाण है। यह मंदिर इस बात का प्रतीक है कि हिन्दू धर्म की जड़ें कितनी गहरी और व्यापक रही हैं।

Image Source : apCambodia Angkor Wat Temple

दुनिया के लिए अनमोल खजाना है अंकोरवाट मंदिर

दुनिया का सबसे बड़े अंकोरवाट हिन्दू मंदिर का इतिहास, आस्था और स्थापत्य कला का अनमोल खजाना है। यह हमें बताता है कि प्राचीन सभ्यताएं कितनी उन्नत और आध्यात्मिक थीं। आज जब हम इसे देखते हैं, तो यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की साझा धरोहर प्रतीत होता है। अंकोरवाट मंदिर की भव्यता, इसकी कहानियां और इससे जुड़ी आस्था आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। यह मंदिर ना केवल हिन्दू धर्म का गौरव है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अमूल्य धरोहर है।

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