नेपाल में तख्तापलट के बाद देश की सत्ता सेना ने संभाल ली है। सोशल मीडिया बैन करने उसे ना हटाने की जिद पर अड़े प्रधानमंत्री रहे केपी शर्मा ओली को आखिरकार प्रदर्शनकारियों की बात माननी पड़ी और इस्तीफा देना पड़ा। इस्तीफे के बाद पहली बार, मंगलवार 10 सितंबर 2025 को नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। शिवपुरी से Gen-Z विरोध प्रदर्शन में शामिल युवाओं के लिए लिखित संदेश भेजा है। ओली ने लिखा, "सरकारी कार्यालयों में आगजनी और तोड़फोड़ अचानक नहीं हुई। आपके मासूम चेहरों का इस्तेमाल गुमराह करने के लिए किया जा रहा है।"
इसके साथ ही ओली ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की गोलीबारी में अपनी जान गंवाने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि दी और कहा कि बच्चों की निश्छल हंसी और उनका स्नेह उन्हें हमेशा रोमांचित करता है। ओली ने पूरे घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है।
मैं हमेशा शांति का पक्षधर रहा हूं
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक केपी ओली ने कहा कि लोकतंत्र जो नागरिकों को बोलने, आने-जाने और सवाल करने का अधिकार देता है, उसकी रक्षा करना उनके जीवन का उद्देश्य रहा है। केपी ओली ने यह भी दोहराया कि वह हमेशा से शांति के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने Gen-Z प्रदर्शनों के पीछे मौजूद शक्तियों पर आरोप लगाया कि वे युवा प्रदर्शनकारियों का इस्तेमाल तोड़फोड़ के लिए कर रहे हैं।
सुशीला कार्की हो सकती हैं अगली पीएम
केपी ओली का बयान ऐसे समय में आया है जब नेपाल में अंतरिम सरकार बनाने को लेकर पहल तेज हो गई है और नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम अंतरिम पीएम की रेस में सबसे आगे चल रहा है। काठमांडू के मेयर बालेन ने भी सुशीला कार्की को अपना समर्थन दे दिया है। इस बीच सुशीला कार्की ने कहा है कि वह सरकार का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं क्योंकि GEN-Z उन्हें बहुत पसंद करते है।
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