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कट्टरपंथियों के आगे झुकी पाकिस्तान की पंजाब सरकार, लाहौर में 'इस्लामपुर को कृष्ण नगर' करने वाले फैसले पर लिया यू-टर्न

पाकिस्तान की फिर इंटरनेशनल लेवल पर बेइज्जती हो गई है क्योंकि चरमपंथियों के दवाब में उसे फिर अपना एक फैसला बदलना पड़ा है। उसे लाहौर में सड़कों के मूल नामों की बहाली पर यूटर्न लेना पड़ा है।

Lahore Road renaming plan- India TV Hindi
Image Source : AP (फाइल फोटो) नवाज शरीफ और मरियम नवाज की बैठक में मूल नामों की बहाली पर हुआ था फैसला।

Pakistan एक बार फिर हंसी का पात्र बन गया है क्योंकि उसे चरमपंथियों के दबाव में आकर अपना फैसला फिर बदलना पड़ा है। दरअसल, लाहौर के एक अफसर ने बीते मंगलवार को बताया कि कुछ कट्टरपंथी तत्वों के प्रेशर में आकर पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने लाहौर की सड़कों और गलियों को उनके मूल ऐतिहासिक नाम देने की अपनी स्कीम को स्थगित कर दिया है, जिसका मकसद लाहौर की विभाजन के पहले वाली विरासत को पुनर्जीवित करना था।

नवाज शरीफ की अध्यक्षता वाली मीटिंग में हुआ था फैसला

पाकिस्तानी अखबार DAWN में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल यानी LAHR ने हाल ही में अपने प्रमुख नवाज शरीफ और उनकी बेटी, पंजाब की सीएम मरियम नवाज की संयुक्त अध्यक्षता में हुई एक मीटिंग में लाहौर और उसके आसपास के क्षेत्र की सड़कों और गलियों के मूल ऐतिहासिक नामों को बहाल करने की मंजूरी दी गई थी।

इन नामों को बदलने की हो रही थी चर्चा

अभी का नाम मूल नाम
इस्लामपुर कृष्ण नगर
बाबरी मस्जिद चौक जैन मंदिर चौक
सुन्नत नगर संत नगर
मुस्तफाबाद धरमपुरा
मौलाना जफर अली खान चौक लक्ष्मी चौक
सर आगा खान रोड डेविस रोड
फातिमा जिन्ना रोड क्वींस रोड
रहमान गली राम गली
बाग-ए-जिन्ना लॉरेंस रोड

पंजाब की सरकार ने अपने फैसले पर लिया यू-टर्न

हालांकि, विरोध होने के बाद अब पंजाब की सरकार ने इस निर्णय से पलटी मार ली है और कहा कि वह अभी लाहौर की सड़कों और गलियों के मूल नामों की बहाली पर सिर्फ विचार कर रही है। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन आर. मोहम्मद अली एजाज के मुताबिक, अभी तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

चरमपंथियों के दवाब में बदलना पड़ा फैसला

सूत्रों के अनुसार, तमाम व्लॉगर्स सहित कुछ चरमपंथी तत्वों ने लाहौर की सड़कों और गलियों के पुराने 'हिंदू और सिख' नामों की बहाली के फैसले के लिए मुख्यमंत्री मरियम नवाज की कड़ी आलोचना की थी। चूंकि, आलोचकों ने मरियम नवाज सरकार के इस निर्णय को धार्मिक रंग दे दिया, इसलिए मरियम नवाज प्रशासन ने खिलाफत से बचने के लिए इस निर्णय को टाल दिया है।

मूल नामों की बहाली पर बनी थी सहमति

LHAR ने हाल ही में इतिहासकारों, वास्तुकारों, विद्वानों, अर्बन प्लानर्स और अन्य प्रमुख व्यक्तियों की एक मीटिंग आयोजित की थी और लाहौर भर की सड़कों, गलियों और इलाकों के मूल नामों की बहाली के प्रपोजल पर उनके सुझाव मांगे थे। इसमें ज्यादातर प्रतिभागियों ने लाहौर की सड़कों और गलियों के ऐतिहासिक नामों को बहाल करने के पक्ष में बात की थी।

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