मॉस्को: रूस की प्रमुख तेल रिफायनरी पर यूक्रेन ने बीती रात बहुत बड़ा ड्रोन हमला किया है। हमले के बाद आसमान में काला धुआं और ऊंची आग की लपटें उठती हुई देखी गईं। यूक्रेन ने जिसे, ड्रोन से निशाना बनाया, वह रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक मानी जाती है। हमले के बाद रिफायनरी में भीषण आग लग गई। रूसी और यूक्रेनी अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि की। रूस की यह तेल रिफायनरी यूक्रेन से करीब 1600 किलोमीटर दूर है।
हर साल 1.77 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल उत्पादन की क्षमता
यूक्रेन ने जिस रिफायनरी को निशाना बनाया, वह रूस के उत्तर-पश्चिमी लेनिनग्राद क्षेत्र में स्थित है। इसे किरिशी रिफ़ाइनरी के नाम से जाना जाता है। यूक्रेन ने शनिवार की रात इसे ड्रोन से निशाना बनाया। इससे हफ्तों पहले भी यूक्रेन ने रूसी तेल अवसंरचना को निशाना बनाया था। यह रिफायनरी हर वर्ष लगभग 1.77 करोड़ मीट्रिक टन या प्रतिदिन 3,55,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है। यूक्रेन के जनरल स्टाफ के अनुसार, घटनास्थल पर विस्फोट और आग लगने की सूचना मिली है। उन्होंने एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें रात के समय आसमान में आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार दिखाई देता है।
रूसी तेल रिफायनरियों पर हमले से ईंधन संकट
बीते कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस के तेल रिफायनरियों को रणनीतिक रूप से निशाना बनाया है। इससे ईंधन का संकट गहराने लगा है। हालांकि इस ताजा हमले पर रूसी अधिकारियों ने हमले के परिणामों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। रूस अभी भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक बना हुआ है, लेकिन मांग में वृद्धि और यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण हाल के सप्ताहों में गैसोलीन की कमी हो गई है। इससे देश के कुछ क्षेत्रों में ईंधन स्टेशनों पर ईंधन की कमी हो गई है और वाहन चालकों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है।
इस कमी को कम करने के प्रयास में, रूस ने गैसोलीन के निर्यात पर रोक लगा दी है। अधिकारियों ने 30 सितंबर तक पूर्ण प्रतिबंध और 31 अक्टूबर तक व्यापारियों तथा बिचौलियों को प्रभावित करने वाले आंशिक प्रतिबंध की बुधवार को घोषणा की। (एपी)
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