हिलेरी सन् 2000 में पहली बार सीनेटर बनीं, 2006 में दोबारा सीनेटर बनीं। 2008 में अमेरिकी सरकार में सेक्रेट्री ऑफ स्टेट बनीं। वह ओबामा के पहले कार्यकाल में 2009 से 2012 तक विदेश मंत्री के रूप में काम कर चुकी हैं। मजबूत, आक्रामक और त्वरित निर्णय लेने वाली महिला के रूप में उन्हें देखा जाता है। उनको लेकर उनके विरोधी मुखर हो गए हैं, क्योंकि ऐसा लगने लगा है कि इस नवंबर आते-आते वहां का चुनाव कहीं एकतरफा तो नहीं हो जाएगा?
हालांकि वहां भी एंटी इंकम्बेन्सी फैक्टर की चर्चा जरूर है। मौजूदा डेमोक्रेटिक पार्टी के बराक ओबामा लगातार दोबारा राष्ट्रपति बने। हिलेरी को इस फैक्टर से दो-चार होना पड़ेगा। लेकिन अमेरिका में पहली बार किसी महिला के उम्मीदवार होने का फायदा उन्हें जरूर मिलेगा, फिर आधी आबादी का साथ व समर्थन तो तय है। वहीं हिलेरी अमेरिका की राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा भी हैं।
हिलेरी क्लिंटन के विरोधी के रूप में सामने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप हैं जो व्यवसायी हैं। उम्मीदवारी सुनिश्चित होने के बाद कई नारों को जन्म दे चुके ट्रंप के बारे में राष्ट्रपति ओबामा कहते हैं कि उनके पास न तो भविष्य की योजनाएं हैं न ही तथ्य। श्रमिकों को लेकर सम्मान भी नहीं है, वो बेवजह का भय पैदा कर रहे हैं।
ओबामा ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप यह दांव हार जाएंगे, क्योंकि अमेरिका के लोग कमजोर या डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड पर आरोप लगाया कि वह पुतिन के साथ निकटता बढ़ाते हैं, सद्दाम हुसैन की प्रशंसा करते हैं और '9-11 हमले के बाद हमारे साथ खड़े रहे नाटो सहयोगियों से कहते हैं कि यदि उन्हें हमारे संरक्षण की जरूरत है तो उन्हें इसके लिए कीमत चुकानी पड़ेगी।'
ओबामा यह भी कहते हैं, "अमेरिका बदले में कीमत नहीं चाहता। हम अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करते हैं और इसीलिए पृथ्वी पर करीब-करीब हर देश अमेरिका को बीते आठ वर्ष की तुलना, अधिक मजबूती और सम्मान के साथ देख रहा है।"
ओबामा ने अमेरिकावासियों से अपील की कि जिस तरह उन्हें बढ़-चढ़ कर समर्थन दिया, वैसा ही हिलेरी को देकर कटुता और डर को नकारें तथा पूरी दुनिया को बता दें कि वहां के लोग अपने महान देश के वादे में विश्वास करते हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप को भी कमतर नहीं आंका जा सकता, क्योंकि उन्होंने 16 उम्मीदवारों को पछाड़कर उम्मीदवारी हासिल की है।
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