तीसरा स्टेप: इस चरण में चुनाव प्रचार शुरु होता है। इसमे पार्टी उम्मीदवार जनता का समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। उम्मीदवार टेलीविजन के माध्यम से कई मुद्दों पर बहस भी करते हैं। इतना ही नहीं अमेरिका में भी चुनाव प्रचार के अंतिम हफ्तों में उम्मीदवार अपना पूरा ध्यान स्विंग स्टेट्स पर लगा देते हैं, ये ऐसे मतदाता होते हैं जो किसी भी पक्ष की तरफ जा सकते हैं।
चौथा स्टेप: यह चौथा और चुनाव प्रक्रिया का अंतिम चरण होता है। इसमें इलेक्टोरल कॉलेज राष्ट्रपति पद के लिए मतदान करता है।
क्या होता है इलेक्टर और इलेक्टर कॉलेज:
राज्यों के मतदाता इलेक्टर चुनते हैं। ये इलेक्टर राष्ट्रपति पद के किसी न किसी उम्मीदवार के समर्थक होते हैं। इलेक्टर चुनने के बाद जनता का काम खत्म हो जाता है। मतलब चुनाव में जनता की भागेदारी यहीं तक सीमित है। ये इलेक्टर मिलकर ही इलेक्टोरल कॉलेज बनाते हैं। यही इलेक्टोरल कॉलेज राष्ट्रपति का चुनाव करता है। इलेक्टोरल कॉलेज में 538 सदस्य होते हैं। आपको बता दें कि अमेरिका में राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 270 इलेक्टोरल वोट जरुरी होते हैं।
अमेरिकी संसद का गणित:
हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव (प्रतिनिधि सभा) में 435 सदस्य होते हैं, जबकि सीनेट में 100 सदस्य बैठते हैं। इन दोनों सदनों को मिलाकर संख्या होती है 535। इसके बाद अमेरिका के 51वें राज्य कोलंबिया से तीन सदस्य आते हैं। यानी इसको मिलाकर 538 इलेक्टर्स अमेरिकी राष्ट्रपति को चुनते हैं।
हर राज्य के इलेक्टोरल की संख्या अलग-अलग:
हर राज्य में इलेक्टर की संख्या और कोटा अलग अलग होती है। लेकिन यह संख्या अमेरिकी संसद के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट के सदस्यों की कुल संख्या के बराबर होती है।
किस दिन होता है अमेरिका में चुनाव:
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का दिन भी बेहद खास होता है। चुनावी साल के दौरान नवंबर महीने में पड़ने वाले पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को मतदान होता है। राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी साल के नवंबर महीने में पड़ने वाले पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को मतदान करता है। इसे सुपर ट्यूसडे कहा जाता है सुपर ट्यूसडे अमेरिकी चुनाव की परंपरा से जुड़ा है और ये नवंबर के पहले सप्ताह में आता है और इसी दिन राष्ट्रपति चुनाव होता है।
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