अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को तेज की सप्लाई करने वाले देशों के खिलाफ टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अब क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल बर्मुडेज ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। क्यूबा के राष्ट्रपति ने अमेरिका के इस कदम की निंदा की है और साथ ही चेतावनी दी है कि इन फैसलों का मकसद असल में क्यूबा की अर्थव्यवस्था का गला घोंटना है। उन्होंने कहा है कि क्यूबा दृढ़ता, शांति और इस विश्वास के साथ इस नए हमले का सामना करेगा कि तर्क पूरी तरह से हमारे पक्ष में है।
ट्रंप ने क्या फैसला किया है
दरअसल, गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को तेल की आपूर्ति करने वाले देशों के खिलाफ नए टैरिफ लगाने की चेतावनी देते हुए एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश में कहा गया था- "क्यूबा को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल बेचने या सप्लाई करने वाले किसी भी देश के उत्पादों के आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।" बता दें कि इस आदेश में क्यूबा को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए असाधारण खतरा बताया गया है। ये भी कहा गया है कि क्यूबा की सरकार कई शत्रु देशों, अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों और अमेरिका के विरोधी तत्वों, जिनमें रूस, चीन और ईरान के साथ-साथ हमास और हिजबुल्लाह भी शामिल हैं, के साथ गठबंधन करता है और उन्हें समर्थन प्रदान करती है।
'मातृभूमि या मौत...'
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल बर्मुडेज ने अमेरिका के इस फैसले को लेकर कहा- "हम क्यूबा के खिलाफ अमेरिका की सरकार के इस नए कदम की कड़ी निंदा करते हैं। हमारे देश को ईंधन की आपूर्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप प्रशासन शक्ति का इस्तेमाल कर के क्यूबा की विदेश नीति को संचालित करने और साम्राज्यवादी वर्चस्व सुनिश्चित करने की अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का एक खतरनाक तरीका अपना रहा है।" क्यूबा के राष्ट्रपति ने आगे कहा- "फैसला एक ही है: मातृभूमि या मौत! हम जीतेंगे!"
संकट में है क्यूबा
बता दें कि अमेरिका और क्यूबा के बीच बीते कई दशकों से बेहद तनावपूर्ण संबंध हैं। साल 2014 में दोनों देशों के संबंधों में सुधार आया था। हालांकि, ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान क्यूबा पर प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईंधन की कमी, बिजली कटौती और खाद्य एवं जल आपूर्ति में व्यवधान के कारण क्यूबा 1959 के बाद से अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
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