वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की आशंकाओं के बीच उस पर सैन्य दबाव को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है। चीन के ग्लोबल टाइम्स अखबर के अनुसार अमेरिका ने ईरान को डील के लिए नई डेडलाइन दे दी है। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने शुक्रवार को संकेत दिया कि व्हाइट हाउस ने ईरान को निजी तौर पर एक समझौते के लिए समय सीमा (डेडलाइन) बता दी है, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसकी तारीख बताने से इनकार कर दिया।
ट्रंप के बयानों ने बढ़ाई हलचल
व्हाइट हाउस में ट्रंप ने पत्रकारों के सवाल पर कि क्या ईरान को कोई समय सीमा दी गई है.. पर जवाब दिया, “केवल वे ही निश्चित रूप से जानते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या पेंटागन के पास मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कम करने की कोई समय-सारिणी है, तो ट्रंप ने कहा, “देखते हैं सब कैसे होता है। उन्हें कहीं तो तैरना ही है, तो वे ईरान के पास ही तैर सकते हैं। ट्रंप के ये ताजा बयान ऐसे समय आए हैं, जब वाशिंगटन ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। दिसंबर 2025 के अंत से ईरान में राष्ट्रव्यापी अशांति और विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
अमेरिका के साथ समझौता करने का समय खो रहा तेहरान
ट्रंप ने इससे पहले बुधवार को कहा था कि एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में एक “विशाल आर्मडा” ईरान की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तेहरान के लिए अमेरिका के साथ समझौता करने का “समय खत्म हो रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शुक्रवार को कहा कि तेहरान हमेशा से विवाद सुलझाने के लिए संवाद और बातचीत का रास्ता अपनाता रहा है और युद्ध नहीं चाहता। उन्होंने पश्चिमी देशों की यह कहते हुए आलोचना की कि वे कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति व्यावहारिक प्रतिबद्धता नहीं दिखाते, जबकि दावा जरूर करते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की नीति “सम्मान-आधारित कूटनीति”, अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में संवाद, पारस्परिक सम्मान और धमकी या जबरदस्ती से परहेज पर आधारित है। उन्होंने चेतावनी दी, “देश और उसके लोगों पर कोई आक्रामक कार्रवाई तत्काल और निर्णायक जवाब मिलेगा।
अमेरिका के साथ बातचीत धमकी के बल पर नहीं होगी-ईरान
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को इस्तांबुल में कहा था कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी के तहत नहीं। वहीं अमेरिका ने कहा है कि ईरान के साथ कोई समझौता यूरेनियम संवर्धन पर प्रतिबंध, पहले से संवर्धित यूरेनियम हटाने, लंबी दूरी की मिसाइलों पर सीमा और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन वापस लेने जैसे सभी शर्तों को शामिल करना चाहिए। हालांकि तेहरान ने ये सभी शर्तें ठुकरा दी हैं। ट्रंप प्रशासन का यह कदम मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा रहा है, जबकि ईरान ने कूटनीतिक रास्ते पर जोर देते हुए युद्ध से इनकार किया है। स्थिति नाजुक बनी हुई है और आगे के घटनाक्रम पर सबकी नजर है।
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