आमतौर पर बच्चों के दांत 6 महीने की उम्र के आसपास निकलने शुरू होते हैं। बच्चों के दांतों की देखभाल के मामले में अक्सर माता-पिता थोड़े संशय में रहते हैं। क्योंकि जब तक बच्चों के दांत नहीं निकलते तब तक वो अपने मसूड़ों से खाना खाते हैं। लेकिन जब बच्चों के दांत निकलने शुरू होते हैं तो ज्यादातर पेरेंट्स का ये मानना होता है कि बच्चों के दांत कुछ दिनों गिर जाएंगे और फिर से नए निकल आएंगे जिस वजह से पेरेंट्स बच्चों के दांतों की देखभाल नहीं करते। लेकिन शायद आपको मालूम नहीं है कि जैसे ही दांत निकले वैसे ही इसकी देखभाल शुरू करनी चाहिए। आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि दांत निकलने के कितने दिन बाद बच्चों को ब्रश कराना चाहिए।
किस समय से कराना चाहिए ब्रश?
डॉ. मेघा सिंह, बीडीएस, एमडीएस, डेंटल सर्जन, प्रकाश हॉस्पिटल का कहना है कि जैसे ही मसूड़े से नन्हा सा दांत बाहर आए, आपको उसे साफ करना शुरू करना शुरू कर देना चाहिए। इसके अलावा दांत आने से पहले भी, हर बार दूध पिलाने के बाद एक साफ, गीले मलमल के कपड़े से बच्चे के मसूड़ों को पोंछना चाहिए। इससे बैक्टीरिया नहीं पनपते। बच्चों के लिए विशेष रूप से आने वाला सॉफ्ट-ब्रिसल वाला छोटा ब्रश ही इस्तेमाल करें। शुरुआती दिनों में आप फिंगर ब्रश का उपयोग भी कर सकते हैं। 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सिर्फ चावल के दाने (Grain of rice) जितनी मात्रा में फ्लोराइड टूथपेस्ट का उपयोग करें।
बच्चों में क्यों हो रही दांतों की समस्या
डॉ. मेघा सिंह, बीडीएस, एमडीएस, डेंटल सर्जन, प्रकाश हॉस्पिटल का कहना है कि आज के समय में बच्चों के दांतों की समस्याएं एक गंभीर स्वास्थ्य विषय बनती जा रही हैं। छोटी उम्र में ही दांतों में कीड़ा लगना, दर्द, सूजन और समय से पहले दांत गिर जाना आम होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, मीठे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन और दांतों की देखभाल के प्रति जागरूकता की कमी है। हाल के वर्षों में दंत चिकित्सा के क्षेत्र में कई नई और आधुनिक तकनीकें विकसित हुई हैं, जिनसे बच्चों के दांतों को बिना दर्द और डर के सुरक्षित रखा जा सकता है
फ्लोराइड टूथपेस्ट, पिट और फिशर सीलेंट के के अलावा आजकल इलेक्ट्रिक टूथब्रश भी बच्चों में लोकप्रिय हो रहे हैं। ये बच्चों को सही समय तक ब्रश करने के लिए प्रेरित करते हैं और दांतों की सफ़ाई अधिक प्रभावी ढंग से करते हैं। दांतों की देखभाल केवल तकनीक से ही नहीं, बल्कि सही खानपान से भी जुड़ी है। बार-बार मीठा, चिपचिपे खाद्य पदार्थ और पैकेज्ड जूस बच्चों के दांतों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी जगह पर फल, दूध, अंडा, पनीर और घर का बना भोजन दांतों के लिए लाभकारी होता है।
बच्चे का पहला दंत परीक्षण एक वर्ष की उम्र में ही करा लेना चाहिए। इससे दांतों की सही वृद्धि की निगरानी की जा सकती है और भविष्य की गंभीर समस्याओं से बचाव संभव है। अंत में यही कहा जा सकता है कि आधुनिक तकनीकों और सही जागरूकता के माध्यम से बच्चों के दांतों को स्वस्थ रखा जा सकता है। माता-पिता की थोड़ी सी सावधानी बच्चों को जीवनभर की दंत समस्याओं से बचा सकती है।