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गांधीजी के उन तीन बंदरों की कहानी, कब मिले, कहां से आए और क्या है असलियत?

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : Jan 31, 2026 02:01 pm IST,  Updated : Jan 31, 2026 02:10 pm IST

बापू का जब भी जिक्र होता है, तो उनसे जुड़े तीन बंदरों की भी बात होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तीनों बंदरों का नाम बापू के साथ कैसे जुड़ा?

गांधीजी के तीन बंदरों की कहानी- India TV Hindi
गांधीजी के तीन बंदरों की कहानी Image Source : INDIA TV

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम आते ही सादगी, सत्य और अहिंसा के साथ-साथ तीन बंदरों की तस्वीर भी ज़हन में उभर आती है। ये तीन बंदर- बुरा न देखो, बुरा न सुनो और बुरा न बोलो- गांधीजी की सोच और जीवन दर्शन का प्रतीक बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ये तीन बंदर बापू से जुड़े कैसे? 

इन तीनों बंदरों के नाम जापानी भाषा से आए

  1. मिज़ारू: जो अपनी आंखें ढककर रखता है, यानी बुरा नहीं देखता
  2. किकाज़ारू: जो अपने कान बंद रखता है, यानी बुरा नहीं सुनता
  3. इवाज़ारू: जो अपना मुंह ढकता है, यानी बुरा नहीं बोलता

जब चीन से आए बापू के मेहमान

माना जाता है कि ये बंदर चीन से बापू तक पहुंचे। दरअसल, देश- विदेश से लोग अक्सर सलाह लेने के लिए महात्मा गांधी के पास आया करते थे। कहा जाता है कि एक बार चीन से एक प्रतिनिधिमंडल महात्मा गांधी से मिलने भारत आया। बातचीत के बाद उन्होंने गांधीजी को भेंट स्वरूप तीन बंदरों का एक छोटा सा सेट दिया। प्रतिनिधिमंडल ने मुस्कुराते हुए कहा कि ये भले ही आकार में खिलौनों जैसे हों, लेकिन उनके देश में बेहद लोकप्रिय और प्रतीकात्मक माने जाते हैं। गांधीजी को यह उपहार इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे जीवन भर अपने पास सहेज कर रखा। यहीं से ये तीन बंदर हमेशा के लिए बापू के नाम के साथ जुड़ गए।

जापान से जुड़ी सदियों पुरानी कहानी

इन तीन बंदरों का रिश्ता सिर्फ चीन तक ही सीमित नहीं है। इनकी जड़ें जापान की संस्कृति में भी गहराई से समाई हुई हैं। साल 1617 में जापान के निक्को स्थित तोगोशु श्राइन में इन तीनों बंदरों की आकृतियां बनाई गई थीं, जो आज भी मौजूद हैं। मान्यता है कि यह विचार चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस से प्रेरित था और आठवीं शताब्दी में चीन से जापान पहुंचा। उस समय जापान में शिंतो संप्रदाय का प्रभाव था, जिसमें बंदरों को पवित्र और सम्माननीय माना जाता है।

वाइज़ मंकीज़ कहा जाता है

जापान में इन तीनों को 'वाइज़ मंकीज़' यानी बुद्धिमान बंदर कहा जाता है। इनकी सांस्कृतिक अहमियत को देखते हुए यूनेस्को ने निक्को के इस धरोहर स्थल को वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में भी शामिल किया है।

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