अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह लोगों की जान नहीं लेना चाहते हैं और इसलिए सहयोगी देशों के कहने पर वह एक बार फिर ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह बातचीत सोमवार दोपहर को होगी। ट्रंप ने कहा कि हम हमला करने के लिए तैयार थे और इस बार का हमला दूसरे विश्वयुद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला होता, लेकिन ईरान ने ऐसा नहीं करने को कहा। उन्होंने आगे कहा कि सऊदी अरब, UAE, कतर और ईरान ने ऐसा करने को कहा है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट पर एक डील होने के साथ ही न्यूक्लियर मामले पर भी डील होने के संकेत दिए हैं।।"
'मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता'
ईरान पर हमले रोकने के अपने फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता क्योंकि लोगों की मौत होती है। हम ऐसा नहीं चाहते। मैंने सऊदी अरब के राजा और क्राउन प्रिंस से पूछा। मैंने कहा, क्या आप चाहेंगे कि हम ऐसा करें या नहीं? उन्होंने कहा, हम एक डील (समझौता) को ज़्यादा पसंद करेंगे। क्योंकि आपको नहीं पता कि ये हमले कहां तक जा सकते हैं। मेरा मतलब है, यह एक बड़ी मुसीबत होगी। बहुत सी बुरी चीजें हो सकती हैं।"
'दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला होता'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "यह एक बहुत बड़ा हमला होने वाला था। यह हमला दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला होता, लेकिन उन्होंने (ईरान ने) हमसे ऐसा न करने को कहा। उन्होंने कहा, प्लीज़ ऐसा मत कीजिए। उनके पड़ोसियों ने भी यही कहा।" उन्होंने आगे कहा, "सऊदी अरब, UAE, कतर और ईरान ने ऐसा करने को कहा है। हम पूरी तरह तैयार थे, यह एक बहुत बड़ा हमला होता। लेकिन जब सहयोगी देश इसे टालने के लिए कहते हैं, तो आपको सोचना पड़ता है, चलिए देखते हैं। और उनके ऐसा कहने की वजह यह है कि उन्हें लगता है कि कोई डील हो सकती है। होर्मुज़ पर एक डील हो सकती है, और फिर न्यूक्लियर मामले पर भी डील होगी।"
'ईरान ने कहा हम डील करना चाहते हैं'
ट्रंप ने कहा, "मैं इसे ईरान का डी-न्यूक्लियराइज़ेशन (परमाणु हथियार खत्म करना) कहता हूं। हम इसे रोके हुए हैं। हम जब चाहें ऐसा कर सकते हैं। ईरान ने भी हमसे अपील की थी। उन्होंने कहा, हम डील करना चाहते हैं। अब, मुझे नहीं पता कि वे क्या कहते हैं क्योंकि कई बार वे मुझसे कुछ कहते हैं और फिर बाहर जाकर कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूं। ज़ाहिर है, वे नहीं चाहते कि उन पर हमला हो। उन्हें हमले की गंभीरता का अंदाज़ा था क्योंकि वे इसे बनते हुए देख रहे थे।"
'सऊदी अरब भी नहीं चाहता हमला हो'
ट्रंप ने आगे कहा, "अब हम जो कर रहे हैं, वह बातचीत के ज़रिए उनसे बात करना है। यह कल (सोमवार) दोपहर शुरू होगी, मैं ऐसा करना पसंद करूंगा। इससे बहुत सारी जानें बचेंगी। बहुत सारी गैर-ज़रूरी ताकत का इस्तेमाल बचेगा। इसे दोबारा बनाने में बहुत-बहुत साल लग जाते हैं। सच कहूं तो, सऊदी अरब भी नहीं चाहता था कि ऐसा (हमला) हो।"
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