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चीन के खिलाफ ट्रंप की टैरिफ नीति बन गई अमेरिकी किसानों के लिए सिरदर्दी? उठाना पड़ रहा करीब 12 अरब डॉलर का नुकसान

डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ जो टैरिफ वाला चक्रव्यूह रचा उसमें अब अमेरिका के किसान ही फंस गए हैं। चीन के पलटवार से अमेरिकी किसानों को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

America Soybean Farmers- India TV Hindi
Image Source : AP America Soybean Farmers

Donald Trump China Tariff Policy: डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी अब अमेरिका के किसानों के लिए ही सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई है। ट्रंप का दावा था कि इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और चीन को झुकना पड़ेगा। लेकिन, इस व्यापार युद्ध की सबसे बड़ी मार अब अमेरिका के किसानों पर पड़ी है। हुआ ऐसा है कि चीन ने अमेरिकी टैरिफ के जवाब में सोयाबीन की खरीद रोक दी है। चीन के इस कदम से अमेरिका के किसान अब अपने सबसे बड़े बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और उन्हें करीब 12 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

चीन रहा है सबसे बड़ा खरीदार

चीन लंबे समय से अमेरिकी कृषि उत्पादों का सबसे बड़ा उपभोक्ता रहा है। खासकर सोयाबीन, मक्का, सूअर का मांस और डेयरी उत्पाद। अमेरिकी किसान हर साल अरबों डॉलर का अनाज और खाद्य सामग्री चीन को बेचते थे। लेकिन, जब ट्रंप ने टैरिफ लगाए तो चीन ने भी पलटवार किया जिससे अमेरिकी किसानों की परेशानी बढ़ गई है। चीन ने अमेरिकी सोयाबीन पर 34 फीसदी शुल्क लगा दिया और फिर खरीद बंद कर दी। नतीजा यह हुआ है कि अमेरिका में अब लाखों टन अनाज गोदामों में सड़ रहा है और किसानों की कमाई पर बुरा असर पड़ा है।

मुश्किल में अमेरिकी कृषि उद्योग

अमेरिकन सोयाबीन एसोसिएशन बिजनेस ग्रुप के चीफ कैलेब रैगलैंड ने कहा था कि यह हमारे कृषि उद्योग के लिए बड़ी चेतावनी और चुनौती है। हालिया जारी एपी की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका में सोयाबीन की फसल कटाई के लिए तैयार है, लेकिन किसानों को यह नहीं पता कि वो अपनी फसल कहां बेचेंगे। हालात ऐसे हैं कि, अमेरिकी बाजार में सोयाबीन की कीमतें गिर गई हैं। किसानों पर कर्ज तो था ही लेकिन अब चीनी झटके ने उनकी कमर तोड़ने का काम किया है। इतना ही नहीं ट्रंप की नीतियों के चलते किसानों को खाद, मशीनरी और पेट्रोलियम उत्पाद महंगे मिल रहे हैं जिससे लागत तो बढ़ी लेकिन दाम घट गए।

Image Source : apAmerica Soybean

क्या कहते हैं आंकड़े?

आकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल अमेरिका ने लगभग 24.5 अरब डॉलर मूल्य का सोयाबीन निर्यात किया था और इसमें चीन ने 12.5 अरब डॉलर मूल्य का अमेरिकी सोयाबीन खरीदा। साफ है कि अमेरिका के लिए चीन सबसे बड़ा बाजार था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल चीन की खरीदारी का आंकड़ा शून्य है। आंकड़ा शून्य है तो अब इसका असर भी देखने को मिला है।

चीन और अमेरिका के बीच नहीं बनी बात

फिलहाल, अमेरिका और चीन के बीच सोयाबीन व्यापार पर कोई बात नहीं बनी है। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अगर इसे लेकर कोई समझौता नहीं हो पाता है, तो वह किसानों के लिए एक सहायता पैकेज पर विचार कर रहे हैं, जो उनके पहले कार्यकाल के दौरान दी गई सहायता के समान होगी। हालांकि, सोयाबीन किसानों का कहना है कि ऐसी राहत सिर्फ एक अस्थायी समाधान होगी और इसका लाभ अस्थाई होगा।

चीन ने पास हैं विकल्प, फंसा अमेरिका

खास बात तो यह है कि चीन ने कदम उठाते हुए अमेरिका पर निर्भरता को लगभग खत्म कर दिया है। अमेरिका को दबाव में लाने के लिए चीन ने सोयाबीन और अन्य अनाज की खरीद ब्राजील, अर्जेंटीना और रूस से शुरू कर दी। चीन के इस कदम से अमेरिकी किसानों का पारंपरिक बाजार छिन गया है। साफ है कि अब चीन के पास विकल्प मौजूद हैं और अमेरिका को नए रास्ते तलाशने होंगे। अमेरिका के लिए नए बाजार की तलाश भी अब आसान नहीं होगी क्योंकि अमेरिकी किसानों का अंतरराष्ट्रीय भरोसा टूट गया। इतना ही नहीं अब अमेरिका के लिए अब नए बाजार में जगह बनाना आसान नहीं होगा।

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