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चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका कर रहा बड़ी तैयारी, उपराष्ट्रपति वेंस ने बताया पूरा प्लान

अमेरिका क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में चीन के दबदबे को कम करने के लिए बड़ी प्लानिंग कर रहा है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ क्रिटिकल मिनरल्स ट्रेडिंग ब्लॉक बनाना चाहता है।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस - India TV Hindi
Image Source : AP अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस

America Plan To Counter China: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अपने सहयोगियों के साथ एक क्रिटिकल मिनरल्स ट्रेडिंग ब्लॉक बनाना चाहता है। यह ट्रेडिंग ब्लॉक कीमतों को बनाए रखने और चीन की उस रणनीति से बचने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल करेगा, जिसमें चीन किसी भी संभावित कॉम्पिटिटर को कमजोर करने के लिए कदम उठा सकता है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका चीन का मुकाबला करने के लिए इस तरह का ब्लॉक बनाना चाहता है।

जेडी वेंस ने क्या कहा?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार को कहा कि पिछले एक साल में ट्रेड वॉर ने यह दिखाया है कि ज्यादातर देश उन क्रिटिकल मिनरल्स पर कितने निर्भर हैं, जिन पर चीन का पूरा कंट्रोल है। वेंस ने विदेश विभाग में विदेश मंत्रियों की एक मीटिंग में कहा, "हम चाहते हैं कि सदस्य देशों के बीच एक ट्रेडिंग ब्लॉक बने, जो अमेरिकी औद्योगिक ताकत तक अमेरिकी पहुंच की गारंटी दे और साथ ही पूरे जोन में प्रोडक्शन को भी बढ़ाए।"

क्रिटिकल मिनरल्स क्या हैं?

क्रिटिकल मिनरल्स 17 रासायनिक तत्वों का समूह हैं, जिनमें नीओडाइमियम, सेरियम, लैंथेनम, प्रसीओडाइमियम, समेरियम, यूरोपियम जैसे धातु शामिल हैं। ये तत्व आमतौर पर पृथ्वी में कम मात्रा में पाए जाते हैं, लेकिन इनका उपयोग अत्यधिक जरूरी है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी स्क्रीन, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन, जेट इंजन, रडार सिस्टम, गाइडेड मिसाइलें और डिफेंस टेक्नोलॉजी, कहना गलत नहीं होगा कि 21वीं सदी का हर 'स्मार्ट' उपकरण इन पर निर्भर है।

चीन का है दबदबा

दुनिया में क्रिटिकल मिनरल्स के खनन और रिफाइनिंग पर चीन का काफी मजबूत नियंत्रण है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, चीन वैश्विक रेयर अर्थ खनन का लगभग 60-70 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, जबकि प्रोसेसिंग/रिफाइनिंग में उसकी हिस्सेदारी 85-90 फीसदी या उससे भी अधिक है। चीन के पास इन खनिजों के विशाल भंडार हैं, खासकर इनर मंगोलिया के बायन ओबो क्षेत्र में, जो दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ डिपॉजिट माना जाता है और चीन के कुल रेयर अर्थ रिजर्व का बड़ा हिस्सा यहीं है।

चीन बाजार पर बना सकता है दबाव 

चीन ना सिर्फ इन खनिजों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करता है, बल्कि उनके अलगाव, रिफाइनिंग और निर्यात में भी पूरी तरह अग्रणी है। नतीजतन, हाई-टेक इंडस्ट्री पर निर्भर कई देश जैसे अमेरिका, जापान, यूरोपीय देश और अन्य इन महत्वपूर्ण धातुओं के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर रहे हैं। यह निर्भरता चीन को एक मजबूत आर्थिक और रणनीतिक लाभ देती है। वह चाहे तो इन खनिजों की आपूर्ति को सीमित या रोककर वैश्विक बाजार पर दबाव डाल सकता है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी, डिफेंस और हाई-टेक सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।

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