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36 करोड़ भारतीयों में है ये घातक बीमारी, दांतों को भींचना है इसका मुख्य लक्षण

What Is Temporomandibular Joints Condition: दांत भींचने की आदत, दांत पीसना, नाखून चबाना और कई बार कान और जॉ वाले एरिया में दर्द होना सामान्य बात नहीं है। ये टेम्पोरोमैंडिबुलर जोड़ (TMJ) का लक्षण हो सकता है। ये एक स्लाइडिंग हिंज का काम करता है। ये जबड़े को सिर से जोड़ता है। इससे जबड़े की मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।

 टेम्पोरोमैंडिबुलर जोड़ - India TV Hindi
Image Source : INDIA TV टेम्पोरोमैंडिबुलर जोड़

शरीर को स्वस्थ रखना है तो एक-एक जॉइंट को जगाने की जरूरत है। कंधे खुलें, घुटने चलें, कमर एक्टिव हो, मसल्स में खून का संचार तेज हो, इसके साथ ही शरीर में एक जॉइंट ऐसा भी है, जिसका इस्तेमाल दिन में हजारों बार होता है। लेकिन उसे चलाना हम भूल जाते हैं। ये है चेहरे का सबसे बिजी जॉइंट यानि जबड़ा। जबड़े से हम बोलते हैं, चबाते हैं, हंसते हैं, जम्हाई लेते हैं, लेकिन जब मुंह खोलते वक्त क्लिक की आवाज आए, चबाने में दर्द हो या जबड़ा लॉक होने लगे, तो ये छोटी परेशानी नहीं, शरीर की चेतावनी है। मेडिकल भाषा में इसे TMD यानी Temporo-mandi-bular Disorder कहते हैं।

क्या है टीएमडी 

ये ज्वाइंट (TMJ) कान के पास होता है और जबड़े की हड्डी को खोपड़ी से जोड़ता है। इसमें गड़बड़ी हो तो जॉ पेन, स्टिफनेस, सिरदर्द, कान दर्द और मुंह खोलने में दिक्कत हो सकती है। मुश्किल ये है कि लोग इसे दांत दर्द, कान दर्द, साइनस या माइग्रेन समझकर टाल देते हैं। इसी का नतीजा है कि करीब 25% लोगों में TMJ से जुड़े हल्के लक्षण दिखते हैं। इनमें से करीब 60% को इलाज की जरूरत पड़ती है।

जबड़े में दर्द को हल्के में न लें 

WHO के मुताबिक TMD दुनिया की 15% आबादी को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। इसकी वजहें हमारी रोजमर्रा की आदतों में छिपी हैं। तनाव में दांत भींचना, नींद में टीथ ग्राइंडिंग, मोबाइल-लैपटॉप पर झुकी गर्दन, ये सब जबड़े को नुकसान पहुंचाते हैं। जब जॉ मसल्स लंबे वक्त तक टाइट रहें, तो लोकल ब्लड फ्लो पर भी असर पड़ता है। ऑक्सीजन कम पहुंचने से दर्द, स्टिफनेस बढ़ सकती है। 

टीएमजे के कराण और लक्षण?

यानी TMJ सिर्फ दांत या कान की बीमारी नहीं है। ये मसल्स, नर्व, पॉश्चर, स्ट्रेस और ब्लड फ्लो सबका मिला-जुला असर है। इसीलिए कई लोगों को जॉ पेन के साथ गर्दन की जकड़न, कान में घंटी, सिरदर्द, चक्कर और दांत दर्द जैसा एहसास भी होता है। अच्छी बात ये है कि हर केस में सर्जरी जरूरी नहीं होती। जल्दी अगर लक्षणों से पता चल जाता है तो सही एक्सरसाइज, स्ट्रेस कंट्रोल, सही पॉश्चर से राहत मिल सकती है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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