थायरॉइड गले में एक ग्लैंड को कहा जाता है जो थायरोक्सिन नाम का हार्मोन बनाता है। ये हार्मोन बॉडी फंशन के लिए कई तरह से जरूरी होता है। अगर किसी व्यक्ति में थायरॉइड ग्लैंड ज्यादा मात्रा में ये हार्मोन बनाने लगे तो उस स्थिति को हाइपर थायरॉडिज्म कहा जाता है। इस बीमारी में थायरॉइड ग्लैंड के ओवर एक्टिव होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बहुत कम हो जाता है। वहीं, हाइपो थायरॉडिज्म में ठीक उल्टा होता है। ये एक ऐसी बीमारी है जिसका असर शरीर पर कई तरह से पड़ता है। इसे 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं।
टमाटर
थायरॉइड के मरीजों को कई चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। इसी तरह से टमाटर को भी खाने में जरूर शामिल करें। इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो थायरॉइड मरीजों के लिए बहुत जरूरी है। टमाटर में मौजूद तत्व शरीर को इस रोग से लड़ने में मदद करते हैं। साथ ही, ये पाचन क्रिया को मजबूत करने में भी कारगर हैं।
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मशरूम
थायरॉइड मरीजों के लिए मशरूम अच्छे आहारों में से एक है। इसमें सेलेनियम की मात्रा अधिक होती है, जो थायरॉइड को कंट्रोल करने का काम करता है। सेलेनियम को थायरॉइड सुपर-न्यूट्रिएंट भी कहा जाता है, जो थायरॉइड से संबंधित ज्यादातर एंजाइम्स के लिए जरूरी होता है।
नट्स
थायरॉइड के मरीजों को नट्स अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहए। थायरॉइड से होने वाले हार्ट अटैक के रिस्क को बहुत कम करता है। बादाम और अखरोट इस बीमारी के लिए अच्छे आहार हैं। आप थायरॉइड को कंट्रोल में रखने के लिए अखरोट और शहद के साथ उसे किसी कांच के जार में रख जें। जार को अच्छे से शेक करें ताकि अखरोट और शहद आपस में अच्छी तरह मिल जाएं। इस जार को अच्छे से बंद करके 7 से 10 दिनों तक ठंडी जगह पर रखें। रोज नाश्ते से पहले इस मिश्रण के 2 चम्मच खाएं। आप इसे रात में भी एक बार खा सकते हैं।
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Disclaimer: यह जानकारी आयुर्वेदिक नुस्खों के आधार पर लिखी गई है। इंडिया टीवी इनके सफल होने या इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। इनके इस्तेमाल से पहले चिकित्सक का परामर्श जरूर लें।
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