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क्या होती है एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी, डॉक्टर से जानें किन कंडीशन में करने की पड़ती है जरूरत?

Endoscopic Spine Surgery: सही समय पर की गई एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी स्पाइन से जुड़ी दर्द से राहत दिलाने के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती है।

एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी

आज के दौर में लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत पोस्चर और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कमर और गर्दन की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में स्पाइन से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल साइंस में भी लगातार नई और एडवांस तकनीकें विकसित हो रही हैं। इन्हीं में से एक आधुनिक वाली तकनीक है एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी। दिल्ली स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स और स्पाइन डॉ. अनिल रहेजा, कहते हैं कि एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी कैसे की जाती है और किस स्थिति में इसे कराने की ज़रूरत पड़ती है?

एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी कैसे की जाती है?

इस सर्जरी में आमतौर पर 5 से 10 मिलीमीटर का छोटा चीरा लगाया जाता है। इस प्रक्रिया में एक पतली ट्यूबनुमा डिवाइस, जिसे एंडोस्कोप कहा जाता है, शरीर के अंदर डाली जाती है। एंडोस्कोप में लगा हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरा स्पाइन के अंदरूनी हिस्सों की स्पष्ट तस्वीर स्क्रीन पर दिखाता है, जिससे सर्जन बिना बड़े कट लगाए सटीक इलाज कर पाते हैं। इस सर्जरी के दौरान मांसपेशियों और टिश्यू को बहुत कम नुकसान पहुंचता है, इसलिए यह सर्जरी ओपन स्पाइन सर्जरी की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है।

किन कंडीशंस में होती है एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी?

  • स्लिप डिस्क: जबस्लिप डिस्क की स्थिति में डिस्क बाहर की ओर खिसककर नसों पर दबाव डालने लगती है और कमर या पैर में तेज दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन होने लगता है, या साइएटिका के कारण कमर से पैर तक जाने वाली नस में लंबे समय तक असहनीय दर्द बना रहता है, तब इस सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। 

  • स्पाइनल स्टेनोसिस: इसी तरह स्पाइनल स्टेनोसिस में रीढ़ की नली के सिकुड़ जाने से नसों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे चलने-फिरने में परेशानी और कमजोरी महसूस होती है। 

  • डिजेनरेटिव डिस्क डिजीज: डिजेनरेटिव डिस्क डिजीज में उम्र बढ़ने या लगातार तनाव के कारण डिस्क के घिस जाने से दर्द और जकड़न बनी रहती है.

  • रीढ़ की नसों पर दबाव: कुछ मामलों में हड्डी, डिस्क या लिगामेंट के बढ़ने से रीढ़ की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे न्यूरोलॉजिकल लक्षण उत्पन्न होते हैं। ऐसी स्थितियों में, जब दवाइयों और फिजियोथेरेपी से राहत नहीं मिलती, एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी एक प्रभावी विकल्प मानी जाती है।

इन बातों का रखें ध्यान:

एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में मरीज को कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है और कई मामलों में 24 से 48 घंटे के भीतर ही छुट्टी मिल जाती है, जिससे वह जल्दी अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है। हालांकि यह सर्जरी आधुनिक और सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन यह हर मरीज या हर तरह की स्पाइन समस्या के लिए उपयुक्त नहीं होती। कुछ जटिल, मल्टी-लेवल या गंभीर स्पाइन कंडीशंस में ओपन सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी का निर्णय हमेशा स्पाइन स्पेशलिस्ट द्वारा पूरी जांच, MRI और क्लिनिकल मूल्यांकन के बाद ही लिया जाना चाहिए। 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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