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गोल्ड लोन का 1.10 करोड़ का सोना लॉकर से गायब, केनरा बैंक में सनसनीखेज मामला

जमशेदपुर में केनरा बैंक की कबीर मेमोरियल शाखा में गोल्ड लोन के तहत गिरवी रखे गए 1 करोड़ 10 लाख 48 हजार रुपये मूल्य के सोने के गायब होने का मामला सामने आया है।

बैंक के लॉकर से सोने के...- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK बैंक के लॉकर से सोने के आभूषणों वाले पैकेट गायब (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जमशेदपुर के मानगो स्थित जाकिर नगर में संचालित केनरा बैंक की कबीर मेमोरियल शाखा में गोल्ड लोन के तहत गिरवी रखे गए करीब 1.10 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के कथित रूप से गायब होने का मामला सामने आने के बाद बैंकिंग महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले में बैंक के रीजनल मैनेजर की शिकायत पर आजादनगर थाने में FIR दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

12 से 18 जून के बीच हुई गड़बड़ी? 

जानकारी के अनुसार, शाखा में नियमित ऑडिट के दौरान गोल्ड लोन से संबंधित रिकॉर्ड का लॉकर में सुरक्षित रखे गए सोने से मिलान किया गया। इस प्रोसेस में कई पैकेट गायब पाए जाने के बाद बैंक प्रबंधन ने तत्काल आंतरिक जांच शुरू की और पूरे मामले की सूचना पुलिस को दी। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि कथित गड़बड़ी 12 जून से 18 जून के बीच हुई।

Image Source : reporter inputकेनरा बैंक की कबीर मेमोरियल शाखा।

पूर्व मैनेजर समेत कई पर FIR

FIR में तत्कालीन शाखा के पूर्व सीनियर मैनेजर एवं प्रथम लॉकर इंचार्ज मोहम्मद शाबीर, गोल्ड लोन ऑफिसर इमरान खान, द्वितीय चाबी अधिकारी सूरज टुडू, अधिकारी रिया घोष, शाखा प्रभारी अनुज टोप्पो समेत दो अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है। बताया गया है कि वर्तमान में इनमें से कोई भी अधिकारी उक्त शाखा में कार्यरत नहीं है।

मामले की जांच कर रही पुलिस

बैंक प्रबंधन ने पुलिस को बताया है कि हर 3 महीने पर होने वाले ऑडिट के दौरान रिकॉर्ड और लॉकर में रखे गए सोने का मिलान किया जाता है। इसी प्रक्रिया में सोने के पैकेट गायब होने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों रुपये मूल्य का सोना किन परिस्थितियों में लॉकर से गायब हुआ, इस कथित अनियमितता में किसकी क्या भूमिका रही और क्या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी। वहीं, बैंक प्रबंधन भी अपने स्तर पर पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।

महत्वपूर्ण- यह मामला बैंक प्रबंधन द्वारा दर्ज कराई गई FIR पर आधारित है। एफआईआर में दर्ज आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और किसी भी आरोपी का दोष सिद्ध नहीं हुआ है। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

वहीं, आपको बता दें कि देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर संसद में एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। 5 साल में ₹1.42 लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड हुआ, इसमें से सिर्फ 4.5% रकम ही रिकवर हो सकी

(रिपोर्ट- गंगाधर पांडे)

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