1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. 5 साल में ₹1.42 लाख करोड़ का हुआ बैंक फ्रॉड, सिर्फ 4.5% रकम ही हो सकी रिकवर; संसद में सामने आई रिपोर्ट

5 साल में ₹1.42 लाख करोड़ का हुआ बैंक फ्रॉड, सिर्फ 4.5% रकम ही हो सकी रिकवर; संसद में सामने आई रिपोर्ट

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jul 21, 2026 08:22 pm IST,  Updated : Jul 21, 2026 08:23 pm IST

देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर संसद में एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। सरकार ने बताया कि पिछले 5 वित्तीय वर्षों में देश के बैंकों और वित्तीय संस्थानों में ₹1.42 लाख करोड़ से ज्यादा की बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए।

देश के बैंकों से उड़ गए...- India TV Hindi
देश के बैंकों से उड़ गए ₹1.42 लाख करोड़! Image Source : CANVA

देश के बैंकिंग सिस्टम में धोखाधड़ी और डूबते पैसों को लेकर संसद में एक बेहद चिंताजनक और चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान कमर्शियल बैंकों और वित्तीय संस्थानों में करीब ₹1.42 लाख करोड़ के बैंक फ्रॉड दर्ज किए गए हैं। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इस विशाल राशि में से बैंक अब तक केवल ₹6,389 करोड़ की ही रिकवरी कर पाए हैं, जो कुल धोखाधड़ी की रकम का मात्र 4.5% हिस्सा है।

संसद में सरकार ने जारी किए आंकड़े

वित्त मंत्रालय ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में कमर्शियल बैंक और ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस में कुल ₹1,42,112 करोड़ की धोखाधड़ी दर्ज की गई। इसमें सरकारी बैंक, निजी बैंक, विदेशी बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान शामिल हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी वाले खातों से रकम की वसूली लगातार जारी रहती है, लेकिन अब तक कुल ₹6,389 करोड़ ही रिकवर किए जा सके हैं।

जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों पर सख्त कार्रवाई

सरकार ने बताया कि जानबूझकर लोन नहीं चुकाने वाले विलफुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने बड़े स्तर पर कानूनी कार्रवाई की है। 31 मार्च 2026 तक 15,577 रिकवरी केस अदालतों में दायर किए गए। वहीं, 10,894 मामलों में SARFAESI Act के तहत कार्रवाई शुरू की गई। जबकि 7,173 एफआईआर दर्ज कराई गईं। इन कानूनी और प्रशासनिक कदमों के जरिए पब्लिक सेक्टर के बैंक ₹52,360 करोड़ की वसूली करने में सफल रहे हैं।

रिकवरी इतनी कम क्यों?

बड़े बैंक फ्रॉड मामलों में आरोपी कई बार संपत्तियां दूसरे नाम पर कर देते हैं या विदेश भाग जाते हैं। लंबी कानूनी प्रक्रिया, अदालतों में वर्षों तक चलने वाले मुकदमे और संपत्तियों की बिक्री में देरी के कारण रिकवरी की रफ्तार काफी धीमी रहती है। यही वजह है कि हजारों करोड़ रुपये के घोटालों में भी पूरी रकम वापस नहीं मिल पाती।

बैंकिंग सिस्टम के लिए बड़ा सबक

सरकार का कहना है कि बैंकिंग व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। आरबीआई और अन्य नियामक संस्थाएं फ्रॉड रोकने के लिए नए नियम लागू कर रही हैं, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को कम किया जा सके। हालांकि संसद में पेश हुए ये आंकड़े साफ बताते हैं कि बैंक फ्रॉड सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाते, बल्कि बैंकिंग सिस्टम और ग्राहकों के भरोसे पर भी बड़ा असर डालते हैं।

यह भी पढ़ें- फर्जी कॉल से लेकर OTP फ्रॉड तक, तेजी से बदला स्कैम करने का तरीका, जानें कैसे रहें सतर्क

इनपुट- ANI

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा