झारखंड की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुए फर्जीवाड़े मामले में CID ने बड़ी कार्रवाई की है। CID ने TDPL के मार्केटिंग मैनेजर और मास्टरमाइंड अभय तिवारी की पत्नी और सगे भाई अक्षय तिवारी को गिरफ्तार किया है। दोनों पर JPSC और JSSC-CGL में अवैध तरीके से सफलता हासिल करने का आरोप है। अभय तिवारी पहले ही जेल जा चुका है।
मंगलवार सुबह CID की टीम गिरिडीह गई थी, जहां दोनों से पूछताछ हुई। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर रांची लाया गया है। JSSC सचिव सुधीर गुप्ता से भी CID पूछताछ कर रही है। अभय तिवारी का भाई अक्षय तिवारी पहले से सरकार कर्मचारी है और 14वीं जेपीएससी की पीटी परीक्षा पास की थी। वहीं, अभय तिवारी की पत्नी सुष्मिता तिवारी ASO के पद पर है, जिसे गिरफ्तार कर रांची लाया गया है।
JPSC के बाद JSSC-CGL भी CID के रडार पर
बता दें कि JPSC के बाद JSSC की CGL परीक्षा भी CID की जांच के दायरे में आ गई है। CID की टीम ने सोमवार को रांची के नामकुम स्थित JSSC मुख्यालय में छापेमारी की थी। कल भी JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता से भी लंबी पूछताछ की गई थी। इससे पहले, CID ने JPSC की डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता गुप्ता से पूछताछ की थी। पूछताछ में श्वेता गुप्ता ने परीक्षा में गड़बड़ी की बात स्वीकार करते हुए इसके लिए JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को जिम्मेदार बताया था। उनका कहना है कि 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा के रिजल्ट उन्होंने पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के निर्देश पर प्रकाशित किए थे।
अब 14वीं JPSC परीक्षा में कथित घोटाले की जांच में एल. ख्यांग्ते खुद CID के शिकंजे में हैं। 22 जुलाई को उन्होंने इस्तीफा दिया था और 10 अगस्त को CID ने उन्हें गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने 2 करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को सरकारी भर्ती परीक्षाओं का कॉन्ट्रैक्ट दिलाया। आरोप के मुताबिक, ख्यांग्ते और कंपनी के बीच यह डील हुई थी कि सरकारी खजाने से कंपनी को जितना भुगतान होगा, उसका 20 फीसदी हिस्सा ख्यांग्ते को दिया जाएगा।
CID ने सोमवार को JPSC की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के PA बी.एन. राम को भी गिरफ्तार किया। उन पर JPSC इंटरव्यू मैनेज कराने के नाम पर 40 लाख रुपये वसूलने का आरोप है। अब तक इस मामले में 22 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अजिता भट्टाचार्य झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य की पत्नी हैं। उन्होंने 9 अगस्त को JPSC से इस्तीफा दिया था।
एक समय में एक साथ दो नौकरी कर रहा था अभय तिवारी
बता दें कि इस पूरे फर्जीवाड़े के केंद्र में खड़े मुख्य आरोपी अभय तिवारी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ था कि वह एक ही समय में एक साथ दो अलग-अलग नौकरियां कर रहा था। एक तरफ अभय तिवारी गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर अपनी असली पहचान यानी 'अभय तिवारी' के नाम से नौकरी कर रहा था। दूसरी तरफ, वही शख्स TDPL कंपनी में 'मनोज तिवारी' के नाम से मार्केटिंग मैनेजर की नौकरी संभाल रहा था।
अभय तिवारी ने 13 साल में 12 सरकारी परीक्षाएं की पास
अभय तिवारी को लेकर ये भी खुलासा हुआ था कि वह पिछले 13 वर्षों में झारखंड में जितनी भी सरकारी परीक्षाएं हुईं, वो हर परीक्षा में बैठा और लगभग सभी में उसने टॉप किया या पहली-दूसरी रैंक हासिल की। उसने इंडियन नेवी (SSR) से लेकर भाभा एटॉमिक सेंटर (असिस्टेंट), नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड, सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल, जेएसएससी पुलिस सब-इस्पेक्टर, जेएसएससी पीजीटी, और जेपीएससी (ACF, FRO, FSO) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं एक ही प्रयास में क्रैक कर डालीं। सीआईडी के अनुसार, अभय तिवारी ने 13 साल में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं।
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