झारखंड में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और घोटाले का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। JPSC के बाद अब कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की CGL परीक्षा भी CID की जांच के दायरे में आ गई है। CID की टीम ने सोमवार को रांची के नामकुम स्थित JSSC मुख्यालय में छापेमारी की। JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता से भी लंबी पूछताछ की गई।
इससे पहले CID ने JPSC की डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता गुप्ता से पूछताछ की थी। पूछताछ में श्वेता गुप्ता ने परीक्षा में गड़बड़ी की बात स्वीकार करते हुए इसके लिए JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को जिम्मेदार बताया। उनका कहना है कि 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा के रिजल्ट उन्होंने पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के निर्देश पर प्रकाशित किए थे।
अब 14वीं JPSC परीक्षा में कथित घोटाले की जांच में एल. ख्यांग्ते खुद CID के शिकंजे में हैं। 22 जुलाई को उन्होंने इस्तीफा दिया था और 10 अगस्त को CID ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि उन्होंने 2 करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को सरकारी भर्ती परीक्षाओं का कॉन्ट्रैक्ट दिलाया। आरोप के मुताबिक, ख्यांग्ते और कंपनी के बीच यह डील हुई थी कि सरकारी खजाने से कंपनी को जितना भुगतान होगा, उसका 20 फीसदी हिस्सा ख्यांग्ते को दिया जाएगा।
CID ने सोमवार को JPSC की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के PA बी.एन. राम को भी गिरफ्तार किया। उन पर JPSC इंटरव्यू मैनेज कराने के नाम पर 40 लाख रुपये वसूलने का आरोप है। अब तक इस मामले में 22 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अजिता भट्टाचार्य झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य की पत्नी हैं। उन्होंने 9 अगस्त को JPSC से इस्तीफा दिया था।
मनी ट्रेल से खुली गड़बड़ी की परत
JPSC घोटाले की जांच में CID को पैसे के लेन-देन के सबूत भी मिले हैं। इसी कड़ी में CID ने JPSC परीक्षा में शामिल हुए सुमन सौरभ को हजारीबाग से गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि सुमन ने परीक्षा पास कराने के लिए रिश्वत देने की डील की थी और भुगतान बैंक अकाउंट के जरिए किया गया। इससे CID को मनी ट्रेल ट्रैक करने में मदद मिली।
CID के मुताबिक, सुमन सौरभ ने बताया कि पवन सिंह नाम के शख्स ने उसे JPSC परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया था। इसके बदले तीन किश्तों में 80 लाख रुपये देने की बात हुई थी। पहली किश्त 20 लाख रुपये प्रीलिम्स से पहले, प्रीलिम्स पास होने के बाद मेन्स से पहले 40 लाख रुपये और इंटरव्यू से पहले बाकी 20 लाख रुपये देने थे।
सुमन के मुताबिक, प्रीलिम्स में पास होने के बाद उसका पवन सिंह पर भरोसा बढ़ गया और उसने उसे 16 लाख रुपये दिए। यह रकम पांच किश्तों में बैंक अकाउंट के जरिए ट्रांसफर की गई।
पूछताछ में सुमन ने यह भी बताया कि वह पहले दो बार JPSC और एक बार JSSC-CGL की परीक्षा दे चुका था, लेकिन तीनों बार फेल हुआ था। इस बार परीक्षा से पहले वह पवन सिंह के संपर्क में आया। आरोप है कि पवन ने उसे निर्देश दिया था कि OMR शीट में सिर्फ उन्हीं सवालों के जवाब भरे, जिनके उत्तर उसे आते हों और बाकी सवाल छोड़ दे।
19 अप्रैल को बोकारो के परीक्षा केंद्र पर हुई परीक्षा में सुमन ने पहली पाली में सिर्फ 38 और दूसरी पाली में 48 सवालों के जवाब दिए। बाकी OMR शीट खाली छोड़ दी गई। इसके बावजूद वह परीक्षा में पास हो गया। रिजल्ट आने के बाद उसकी खाली छोड़ी गई OMR शीट लीक हुई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और CID ने सुमन को गिरफ्तार कर लिया।
JSSC-CGL को लेकर छात्रों का आंदोलन
JPSC परीक्षा में गड़बड़ी के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी है। लेकिन आंदोलन कर रहे छात्र JSSC-CGL परीक्षा को भी रद्द करने और पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग कर रहे हैं। सरकार फिलहाल इन मांगों पर तैयार नहीं है।
सोमवार को छात्रों के दो प्रतिनिधिमंडलों को बातचीत के लिए बुलाया गया था। दोपहर 2 बजे बातचीत होनी थी। अधिकारियों की गाड़ियां छात्रों को लेने जयपाल मुंडा स्टेडियम भी पहुंच गई थीं। लेकिन इसी दौरान अधिकारियों को सूचना मिली कि मंत्रियों का समूह बातचीत के लिए अभी तैयार नहीं है। इसके बाद छात्रों को कुछ देर बाद बुलाने की बात कही गई, लेकिन छात्र सरकार के बुलावे का इंतजार करते रहे।
आंदोलन कर रहे छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर मंगलवार तक कोई फैसला नहीं हुआ तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब तक छात्र गांधी के रास्ते पर चल रहे हैं, लेकिन सरकार का रुख नहीं बदला तो उन्हें भगत सिंह वाला रास्ता भी पता है।
राहुल गांधी की चिट्ठी से बढ़ा सियासी दबाव
इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी भी सामने आई। 14 अगस्त की तारीख वाली इस चिट्ठी को सोमवार को जारी किया गया। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से आंदोलन कर रहे छात्रों से तुरंत बातचीत करने और उनकी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की मांगें जायज हैं और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने छात्रों के आंदोलन को शांतिपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके साथ किसी तरह की सख्ती ठीक नहीं है और कांग्रेस इसका विरोध करती है।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से खुद छात्रों से मिलने और उनकी बात सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ मांगें मान ली हैं और छात्रों को बातचीत के लिए भी बुलाया है, लेकिन अभी भी कई छात्र भूख हड़ताल पर हैं। ऐसे में सरकार को उनकी बाकी मांगों पर भी जल्द फैसला करना चाहिए।
राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने भी छात्रों के समर्थन में बयान दिए। रंजीता रंजन ने कहा कि झारखंड सरकार में सहयोगी होने के बावजूद इस मुद्दे पर उनकी पार्टी छात्रों के साथ है और मुख्यमंत्री को छात्रों से मिलना चाहिए।
वहीं बीजेपी नेताओं ने झारखंड सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर हेमंत सोरेन सरकार ईमानदार है और भर्ती घोटाले में सरकार के मंत्री शामिल नहीं हैं तो CBI जांच की सिफारिश करने में क्या दिक्कत है।
बता दें कि झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ नए नाम सामने आ रहे हैं और गिरफ्तारियों का सिलसिला भी जारी है। मामला सिर्फ एक-दो परीक्षाओं तक सीमित नजर नहीं आ रहा। JPSC से लेकर JSSC-CGL तक उठ रहे सवालों ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार का यह कहना कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जा रहा है और परीक्षा रद्द कर दी गई है।
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