केसर बेहद कीमती मसाला है, जिसकी 1-2 ग्राम की कीमत सैकड़ों में होती है। केसर तासीर में गर्म होता है और इसका इस्तेमाल चाय, खीर, हलवा, मिठाई और पुलाव जैसी कई डिश बनाने में किया जाता है। सर्दी जुकाम होने पर केसर का सेवन फायदेमंद माना जाता है। भारत में कश्मीर में केसर की अच्छी पैदावार होती है। ऐसे में अगर आप केसर खरीद रहे हैं तो जान लें असली और मिलावटी केसर में क्या अंतर होता है। असली केसर की पहचान कैसे करें। कहीं केसर के नाम पर आपको रंगीन धागे तो नहीं पकड़ा दिए। कश्मीर में केसर बेचने वालों ने इसकी पहचान बताई है। आप इन तीन तरीकों से असली और नकली केसर की पहचान कर सकते हैं।
असली और नकली केसर की पहचान
रंग- असली और नकली केसर में फर्क समझने का एक सबसे बड़ा और असरदार तरीका है केसर से निकलने वाला रंग। जो शुद्ध और असली केसर होती है वो पानी में धीरे-धीरे और पीला रंग छोड़ती है। रंग छोड़ने के बाद भी इसके धागे लाल ही रहते हैं। ये केसर पानी में तुरंत नहीं घुलती है। असली केसर रंग छोड़ने के बाद भी वैसी की वैसी रहती है। वहीं नकली केसर के धागे पानी में डालते ही रंग छोड़ने लगते हैं। इनका रंग ज्यादा गहरा होता है। ये केसर पानी के गिलास में नीचे की और भी चली जाती है और इसके धागे रंग हटने के बाद हल्के रंग के हो जाते हैं। नकली केसर हल्का नारंगी रंग छोड़ती है। कई बार इसके धागे पानी में घुल जाते हैं।
स्वाद- प्योर केसर का स्वाद और गंध भी अलग होती है। असली केसर के 2-3 धागे मुंह में रखें और उन्हें चबाएं। इसमें हल्का कड़वापन होता है। इसका स्वाद हल्का तीखा लगता है और नेचुरल खुशबू आती है। वहीं नकली केसर के धागों का स्वाद हल्का मीठा होता है। कई बार इनमें कलर की वजह से तेज गंध आती है। नकली केसर के धागों का रंग जीभ और दांतों पर तुरंत दिखाई देने लगता है।
पानी में डालकर देखें- असली केसर के धागे पानी में डालने पर तैरते रहते हैं, जबकि नकली केसर के कुछ धागे पानी में डालने पर डूब जाते हैं। केसर के फूल में कुछ धागे केसर के रंग वाले होते हैं जिन्हें मेल कहा जाता है वहीं कुछ सफेद रंग के रेशे होते हैं जिन्हें फीमेल कहा जाता है। मेल धागों का इस्तेमाल केसर के रूप में किया जाता है, लेकिन कुछ लोग फीमेल सफेद धागों को आर्टिफिशियल रंग में रंगकर बेचने का काम करते हैं।
केसर खरीदते वक्त किन बातों का ध्यान रखें?
केसर खरीदते वक्त ध्यान रखें कि धागे बहुत ज्यादा चमकीले नहीं होने चाहिए। ऐसा नहीं है कि केसर के धागे लाल होंगे तो ज्यादा अच्छे होंगे। इसमें मिलावटी रंग का भी इस्तेमाल हो सकता है। अगर केसर से अजीब सी गंध आ रही हो या नमी जैसी महसूस हो रही हो तो उसे खरीदने से बचें। पिसी हुई केसर का पाउडर लेने की बजाय केसर के धागे खरीदकर लाएं। केसर के पैकेट को अच्छी तरह से जांच लें। इसमें उत्पाद का नाम, मात्रा, बैच विवरण और दूसरी जानकारी चेक करके ही खरीदें। बिना लेबलिंग वाली केसर खरीदने से बचें।
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