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हार के डर को जीत में बदल सकते हैं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के ये अनमोल विचार, यहां पढ़ें उनके मोटिवेशनल कोट्स

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में जब कल उनका जन्मदिन मनाया जा रहा है तो यहां हम उनके कुछ मोटिवेशनल कोट्स लेकर आए हैं जो हार के डर को जीत में बदल सकते हैं।

हार के डर को जीत में बदल सकते हैं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के ये अनमोल विचार- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV हार के डर को जीत में बदल सकते हैं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के ये अनमोल विचार

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे। वह एक महान दार्शनिक, विद्वान और प्रसिद्ध शिक्षक थे, जिनके सम्मान में भारत में हर साल 5 सितंबर को 'शिक्षक दिवस' मनाया जाता है। इन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय, कलकत्ता विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। साथ ही वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति भी रहे। उन्होंने भारतीय दर्शन की व्याख्या पश्चिमी दुनिया के सामने बहुत ही सरल और प्रभावशाली ढंग से की, जिससे दुनिया भर में भारतीय संस्कृति का मान बढ़ा। जब वे राष्ट्रपति बने, तो उनके छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने का आग्रह किया। इस पर उन्होंने कहा, "मेरा जन्मदिन अलग से मनाने के बजाय अगर इसे 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।" ऐसे में जब कल उनका जन्मदिन मनाया जा रहा है तो इस खास मौके पर यहां पढ़ें उनके अनमोल विचार, मोटिवेशनल कोट्स। 

  • शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है। अत: विश्व को एक ही इकाई मानकर शिक्षा का प्रबंधन करना चाहिए।
  • ज्ञान हमें शक्ति देता है, प्रेम हमें परिपूर्णता देता है।
  • शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को जबरन ठूंसे, बल्कि वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें।
  • भगवान की पूजा नहीं होती बल्कि उन लोगों की पूजा होती है जो उनके नाम पर बोलने का दावा करते हैं।
  • कोई भी आजादी तब तक सच्ची नहीं होती,जब तक उसे विचार की आजादी प्राप्त न हो। किसी भी धार्मिक विश्वास या राजनीतिक सिद्धांत को सत्य की खोज में बाधा नहीं देनी चाहिए।
  • किताबें पढ़ने से हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी मिलती है।
  • दुनिया के सारे संगठन अप्रभावी हो जाएंगे यदि यह सत्य कि ज्ञान अज्ञान से शक्तिशाली होता है उन्हें प्रेरित नहीं करता।
  • शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध लड़ सके।
  • पुस्तकें वह साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।
  • अगर हम दुनिया के इतिहास को देखें, तो पाएंगे कि सभ्यता का निर्माण उन महान ऋषियों और वैज्ञानिकों के हाथों से हुआ है,जो स्वयं विचार करने की सामर्थ्य रखते हैं,जो देश और काल की गहराइयों में प्रवेश करते हैं,उनके रहस्यों का पता लगाते हैं और इस तरह से प्राप्त ज्ञान का उपयोग विश्व श्रेय या लोक-कल्याण के लिए करते हैं।

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