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इन महिलाओं को 90 प्रतिशत कम होता है डिमेंशिया का खतरा

अधेड़ावस्था में शारीरिक रूप से फिट रहने वाली महिलाओं में बाद के दिनों में डिमेंशिया या भूलने की बीमारी की आशंका 90 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

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हेल्थ डेस्क:  भागदौड़ भरी लाइफ में हमारे पास इतना समय नहीं होता है कि हम खुद का ध्यान रख पाएं। जिसके कारण कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में से एक समस्या है डिमेंशिया यानी कि भूलने की बीमारी। हर तीसरी महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ता है। लेकिन एक शोध में ये बात सामने आई कि जो महिलाएं हेल्दी होती है। उन्हें ये बीमारी छू भी नहीं सकती है।

अधेड़ावस्था में शारीरिक रूप से फिट रहने वाली महिलाओं में बाद के दिनों में डिमेंशिया या भूलने की बीमारी की आशंका 90 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि खुद पर कम ध्यान देने वाली महिलाओं की तुलना में अच्छी तरह चुस्त- दुरूस्त रहने वाली महिलाओं को औसतन 11 साल बाद इस बीमारी का सामना करना पड़ता है।

इस तरह कम फिटनेस की स्थिति में 79 की उम्र में इसका सामना करना पड़ता है जबकि सेहत के प्रति जागरूक महिलाओं को 90 वर्ष की अवस्था में इससे जूझना पड़ता है।

स्वीडन में गुटेनबर्ग विश्वविद्यालय की हेलेना होर्डर ने कहा कि ये नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं क्योंकि अधेड़ावस्था में फिटनेस पर ध्यान देने से डिमेंशिया बीमारी के बढ़ने की रफ्तार कम हो सकती है या इसमें देरी हो सकती है।

होर्डर ने कहा कि अभी और अध्ययन किये जाने की जरूरत है ताकि देखा जा सके कि तंदुरूस्ती से डिमेंशिया के खतरे परकितना सकारात्मक असर पड़ता है। यह अध्ययन पत्रिका न्यूरोलॉजी में प्रकाशित हुआ है ।

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