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World Sleep Day 2018: दुनिया में 10 करोड़ लोगों को अच्छी नींद नहीं आती, कारण हैरान करने वाला

दुनियाभर में 10 करोड़ लोग स्लीप एप्निआ यानी अच्छी नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक लोग तो इस बीमारी से ही अनभिज्ञ हैं और 30 प्रतिशत लोग नींद लेते भी हैं तो उसे नियमित बनाए नहीं रख पाते। जानिए इसके कारण....

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होते है इस बीमारी के शिकार
फिलिप्स में निद्रा और श्वसन देखभाल विभाग के प्रमुख डॉ. हरीश आर. ने कहा, "स्लीप डिसऑर्डर लोगों की समझ से अधिक गंभीर समस्या है, इसका सीधा संबंध अन्य गंभीर बीमारियों जैसे हृदय संबंधी रोग, मधुमेह और हृदयाघात आदि से है। ऐसे देश में जहां खर्राटों को पारंपरिक रूप से ध्वनि नींद से जोड़कर देखा जाता है, वहां लोगों को इस बारे में जागरूक करना कि यह एक गंभीर स्लीप डिसऑर्डर है, अत्यंत चुनौतीपूर्ण है।"

उन्होंने कहा, "स्लीप डिसऑर्डर पर जागरूकता कार्यक्रम के साथ लोगों ने अब अपने स्वास्थ्य को सुधारने में इसके महत्व को महसूस करना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ वर्षों में हम जागरूकता में वृद्धि करने में सक्षम रहे हैं, लेकिन अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है।"

नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निद्रा चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय मनचंदा ने कहा, "नींद जीवन का एक अनिवार्य और सक्रिय चरण है। हालांकि लोग ऐसे मुद्दों के प्रति अधिक शिक्षित और जागरूक बन रहे हैं, जिनके कारण स्लीप डिसऑर्डर पैदा हो सकते हैं, फिर भी यहां बहुत बड़ी जनसंख्या अभी भी लापरवाह है।"

उन्होंने कहा कि स्लीप एप्निआ आमतौर पर हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसे एक या अधिक सह-रोगों के साथ जुड़ा हुआ है। ज्यादातर नींद की समस्या पूरी तरह से इलाज योग्य है और कई मामलों में इलाज वाले व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता में महत्वपूर्ण परिवर्तन भी देखा गया है।

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