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अप्रैल 2027 से महंगी हो जाएंगी पेट्रोल-डीजल कारें? सरकार ने जारी किया CAFE-III का नया ड्राफ्ट

केंद्र सरकार ने यात्री वाहनों के लिए CAFE-III का नया ड्राफ्ट जारी किया है। प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इनका मकसद कारों की ईंधन खपत कम करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और स्वच्छ तकनीक को बढ़ावा देना है।

CAFE-III का नया ड्राफ्ट...- India TV Hindi
Image Source : CANVA CAFE-III का नया ड्राफ्ट सरकार ने किया जारी

अगर आप आने वाले वर्षों में नई पेट्रोल या डीजल कार खरीदने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE)-III के नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य कारों की ईंधन खपत कम करना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है। प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे और अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेंगे। माना जा रहा है कि नए मानकों को पूरा करने के लिए ऑटो कंपनियों को नई तकनीक अपनानी पड़ेगी, जिससे कुछ मॉडलों की कीमत बढ़ सकती है।

क्या हैं CAFE-III के नए नियम?

सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक 2027-28 से 2031-32 के बीच बनने या आयात होने वाली एम-1 कैटेगरी की यात्री कारों पर ये नियम लागू होंगे। इसमें ड्राइवर के अलावा अधिकतम आठ सीटों वाली कारें शामिल हैं। ड्राफ्ट के अनुसार कंपनियों को अपनी पूरी कार लाइन-अप की औसत ईंधन खपत में लगातार सुधार करना होगा। वर्ष 2027-28 में जहां औसत ईंधन खपत का लक्ष्य 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर रखा गया है, वहीं 2031-32 तक इसे घटाकर 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर करना होगा। इसी तरह कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का लक्ष्य भी लगातार कम किया जाएगा।

ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने पर मिलेगा फायदा

सरकार ने पहली बार कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर (CNF) का प्रस्ताव भी रखा है। इसका लाभ उन वाहनों को मिलेगा जो एथेनॉल, बायोफ्यूल या कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) जैसे स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन, प्लग-इन हाइब्रिड, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड, फ्लेक्स-फ्यूल और अन्य ईंधन बचाने वाली तकनीक वाली कारों को विशेष प्रोत्साहन देने का भी प्रस्ताव है। इससे कंपनियों को स्वच्छ तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

नियम पूरे नहीं किए तो लगेगा जुर्माना

ड्राफ्ट में एक क्रेडिट और डेबिट सिस्टम भी प्रस्तावित किया गया है। जो कंपनियां तय लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करेंगी, उन्हें क्रेडिट मिलेगा। वहीं लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली कंपनियां दूसरे निर्माताओं से क्रेडिट खरीद सकेंगी या ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) से निर्धारित कीमत पर क्रेडिट ले सकेंगी। शुरुआती कीमत ₹2,500 प्रति क्रेडिट तय की गई है, जो हर साल ₹500 बढ़ेगी। नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनियों पर ऊर्जा संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

क्या ग्राहकों पर पड़ेगा असर?

नए मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियों को इंजन और अन्य तकनीकों में निवेश करना पड़ेगा। इससे शुरुआती दौर में कुछ पेट्रोल और डीजल कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि दूसरी ओर, ग्राहकों को बेहतर माइलेज वाली और कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियां मिलेंगी, जिससे लंबे समय में ईंधन पर होने वाला खर्च कम हो सकता है।

इनपुट- PTI

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