पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव अब खत्म हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दोनों देशों के बीच कई महीनों से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने बुधवार को इस समझौते पर साइन किए और यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया है। इसका सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
पिछले कुछ दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट आई है, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात सामान्य बने रहे तो भारत और ईरान के बीच तेल कारोबार का पुराना रिश्ता एक बार फिर मजबूत हो सकता है।
तेजी से टूटे कच्चे तेल के दाम
युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 138 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, वहीं आज सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 77.93 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 74.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। महज चार दिनों में तेल की कीमतों में करीब 18 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
भारत-ईरान तेल कारोबार फिर पकड़ सकता है रफ्तार
साल 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत को ईरान से तेल खरीदना बंद करना पड़ा था। इससे पहले भारत रोजाना करीब 3 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल आयात करता था और ईरान देश के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। अब हालात सामान्य होने की स्थिति में भारतीय रिफाइनरी कंपनियां फिर से ईरानी तेल खरीद सकती हैं। इससे भारत को सस्ता कच्चा तेल मिलने के साथ-साथ शिपिंग और परिवहन लागत में भी बड़ी कमी देखने को मिल सकती है।
इन 6 सेक्टर्स को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा
- एविएशन सेक्टर: एयरलाइंस कंपनियों के खर्च का बड़ा हिस्सा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर होता है। तेल सस्ता होने से एयरलाइंस का खर्च घटेगा और मुनाफा बढ़ सकता है।
- ऑटो सेक्टर: ईंधन कीमतों में कमी से वाहन चलाने की लागत घटेगी। इससे ऑटोमोबाइल की मांग बढ़ने की संभावना है।
- तेल विपणन कंपनियां: IOC, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को सस्ते कच्चे तेल का सीधा फायदा मिल सकता है।
- FMCG सेक्टर: कच्चे माल और परिवहन लागत कम होने से FMCG कंपनियों के मार्जिन बेहतर हो सकते हैं।
- पेंट और केमिकल उद्योग: पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की कीमतें घटने से पेंट, केमिकल और एडहेसिव कंपनियों का उत्पादन खर्च कम होगा।
- लॉजिस्टिक्स और शिपिंग सेक्टर: माल ढुलाई की लागत घटने से लॉजिस्टिक्स कंपनियों की कमाई और परिचालन दक्षता में सुधार हो सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
तेल की कीमतों में गिरावट से भारत का आयात बिल कम होगा, महंगाई पर दबाव घटेगा और रुपये को भी मजबूती मिल सकती है। यही वजह है कि बाजार इस शांति समझौते को सिर्फ कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी खबर के रूप में देख रहा है।
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