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HPCL और BPCL के निवेशकों को बड़ा झटका! मुनाफे की जगह घाटे में पहुंचीं सरकारी तेल कंपनियां, जानिए आखिर क्या हुआ?

पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में आई तेजी ने भारत की दिग्गज सरकारी तेल विपणन कंपनियों का गणित बिगाड़ दिया है। HPCL और BPCL चालू तिमाही में घाटे में फिसल गई हैं।

HPCL और BPCL को हुआ तगड़ा...- India TV Hindi
Image Source : ANI HPCL और BPCL को हुआ तगड़ा नुकसान

देश की दो बड़ी सरकारी तेल कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के जून तिमाही नतीजों ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। पिछले साल इसी अवधि में हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने वाली दोनों कंपनियां इस बार भारी घाटे में पहुंच गई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल व एलपीजी की कीमतों में बदलाव न होना रही।

HPCL ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 12,265 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 4,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। हालांकि कंपनी का परिचालन राजस्व 21 फीसदी बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, लेकिन बढ़ती लागत ने मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर दिया।

15 तिमाहियों बाद भी घाटे में BPCL

BPCL को भी इस तिमाही में 3,962 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। यह कंपनी का लगातार 15 तिमाहियों बाद पहला नुकसान है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 6,123 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। हालांकि कंपनी का राजस्व बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गया, लेकिन ईंधन बिक्री पर हुए नुकसान ने पूरी कमाई पर असर डाल दिया।

आखिर क्यों हुआ इतना बड़ा नुकसान?

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा उछाल आया। इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें नहीं बढ़ाईं। बाद में कीमतों में बढ़ोतरी हुई, लेकिन वह बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं थी। एलपीजी सिलेंडर पर भी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। HPCL ने अकेले इस तिमाही में 3,607 करोड़ रुपये, जबकि BPCL ने 3,485 करोड़ रुपये की एलपीजी अंडर-रिकवरी दर्ज की।

रिफाइनिंग से कमाई हुई, लेकिन मार्केटिंग में नुकसान भारी पड़ा

दोनों कंपनियों की रिफाइनिंग से अच्छी कमाई हुई। HPCL का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन बढ़कर 23.80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, लेकिन पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हुए नुकसान ने इस लाभ को पूरी तरह खत्म कर दिया।

आगे क्या है उम्मीद?

दोनों कंपनियों का कहना है कि उन्होंने मुश्किल हालात के बावजूद पूरे देश में ईंधन की सप्लाई बाधित नहीं होने दी। साथ ही रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने, नई परियोजनाओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी रखा है।

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