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कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल, 4% उछलकर 8513 प्रति बैरल पहुंचा क्रूड ऑयल; सप्लाई संकट की आशंका से बाजार में अफरा-तफरी!

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jul 22, 2026 05:50 pm IST,  Updated : Jul 22, 2026 05:50 pm IST

पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संघर्ष और जिओपॉलिटिकल तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। सप्लाई ठप होने के डर से बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतें...- India TV Hindi
कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी Image Source : CANVA

वेस्ट एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर अब पूरी दुनिया के तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल 4.45 फीसदी यानी 363 रुपये की तेजी के साथ 8,513 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। लगातार चौथे कारोबारी दिन आई इस तेजी ने निवेशकों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में आशंका है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है।

एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल भी 169 रुपये यानी 2.12 फीसदी बढ़कर 8,152 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 4.4 फीसदी उछलकर 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जो पिछले करीब सात हफ्तों का उच्च स्तर है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी करीब 4.7 फीसदी बढ़कर 88 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।

क्यों बढ़ीं कच्चे तेल की कीमतें?

वेस्ट एशिया में लगातार बिगड़ते हालात इस तेजी की सबसे बड़ी वजह हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने, रेड सी में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तेल टैंकरों पर बढ़ते खतरे ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत की संभावना से इनकार करते हुए चेतावनी दी है कि अगर रेड सी में जहाजों को निशाना बनाया गया तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। इन घटनाओं के चलते निवेशकों ने बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद शुरू कर दी।

भारत पर भी पड़ सकता है असर

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर क्रूड महंगा बना रहता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही परिवहन लागत बढ़ने से कई जरूरी सामान भी महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई में इजाफा होने की आशंका है।

अब आगे किस पर रहेगी नजर?

बाजार की नजर अब कतर की राजधानी दोहा में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हुई है। अगर दोनों देशों के बीच बातचीत सफल रहती है और तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है। लेकिन यदि संघर्ष और गहराता है या रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होती है, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और तेज उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए अगले कुछ दिन बेहद अहम रहने वाले हैं।

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