RBI के रेपो रेट बढ़ाने के फैसले के बीच HDFC बैक ने अपने कुछ ग्राहकों को राहत दी है। बैंक ने 7 अक्टूबर 2026 से सभी अवधि की MCLR यानी फंड्स की मार्जिनल कॉस्ट पर आधारित लेंडिंग रेट में 5 से 15 बेसिस पॉइंट तक कटौती की है। इससे MCLR से जुड़े कुछ फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दर कम हो सकती है और रीसेट डेट आने पर ग्राहकों की EMI में भी राहत मिल सकती है। हालांकि, इसका फायदा हर ग्राहक को तुरंत नहीं मिलेगा।
15 बेसिस पॉइंट तक MCLR घटाया
एचडीएफसी बैंक ने सबसे ज्यादा कटौती 1 महीने की MCLR में की है। इसमें 15 बेसिस पॉइंट की कमी के बाद नई दर 7.75 फीसदी हो गई है। वहीं ओवरनाइट और 3 महीने की MCLR में 10-10 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई है। बाकी अवधि की दरों में 5 बेसिस पॉइंट की कमी की गई है।
बैंक की नई MCLR दरें इस प्रकार हैं:
Image Source : HDFC bank official websiteHDFC बैंक की नई MCLR दरें
सितंबर के मुकाबले कितनी हुई कमी?
सितंबर में एचडीएफसी बैंक की MCLR 7.90 फीसदी से 8.60 फीसदी के बीच थी। अब सभी अवधि की दरों में कटौती की गई है। उदाहरण के लिए, 1 साल की MCLR 8.35 फीसदी से घटकर 8.30 फीसदी हो गई है। इसी तरह 2 साल की दर 8.45 फीसदी से घटकर 8.40 फीसदी और 3 साल की दर 8.60 फीसदी से घटकर 8.55 फीसदी हो गई है।
किसकी EMI हो सकती है कम?
MCLR में कटौती का मतलब यह नहीं है कि हर होम लोन ग्राहक की EMI तुरंत कम हो जाएगी। इसका फायदा मुख्य रूप से उन ग्राहकों को मिल सकता है जिनका लोन MCLR से लिंक है और जिनकी ब्याज दर की रीसेट डेट आ चुकी है। अगर आपका होम लोन रेपो रेट जैसे किसी दूसरे बेंचमार्क से जुड़ा है, तो एचडीएफसी बैंक की MCLR कटौती का सीधा असर आपके लोन पर जरूरी नहीं है। इसलिए ग्राहकों को अपने लोन एग्रीमेंट में लागू बेंचमार्क और रीसेट डेट जरूर जांचनी चाहिए।
क्या है MCLR?
MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर है, जिसके आधार पर बैंक अपने विभिन्न लोन की ब्याज दर तय करता है। RBI ने इसे 2016 में लागू किया था। MCLR में बदलाव होने पर इससे जुड़े फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दर भी बदल सकती है।
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