भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद देश के करोड़ों लोन ग्राहकों का पूरा बजट डगमगा सकता है। फरवरी 2023 के बाद पहली बार केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट बढ़ाकर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) के इस फैसले का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। अब नए लोन लेने वालों के साथ-साथ पुराने लोन ग्राहकों के लिए भी होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की दरें महंगी होने जा रही हैं।
आपकी EMI और लोन की अवधि पर क्या पड़ेगा असर?
जिन लोगों ने फ्लोटिंग रेट पर होम, कार या पर्सनल लोन ले रखा है, उनकी मासिक किस्त (EMI) या लोन की समय सीमा दोनों में इजाफा देखने को मिल सकता है। अगर बैंक रेपो रेट की पूरी 0.25% बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं, तो आपकी हर महीने जाने वाली किस्त की राशि बढ़ जाएगी। वहीं, कई मामलों में बैंक आपकी किस्त की रकम में बदलाव न करके आपके लोन का टेन्योर को बढ़ा देते हैं, जिसका मतलब है कि आपको ज्यादा महीनों तक किस्तें भरनी होंगी। हालांकि, जिन ग्राहकों ने फिक्स्ड रेट पर लोन लिया हुआ है, उन पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कौन-कौन से लोन सबसे पहले होंगे महंगे?
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, जून अंत तक बैंकों के कुल फ्लोटिंग रेट रुपये लोन का लगभग 68.2 प्रतिशत हिस्सा एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR) से जुड़ा हुआ था।
- रेपो रेट से जुड़े लोन (EBLR/RLLR): रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार बैंकों को एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े लोन की दरों में कम से कम तीन महीने में एक बार संशोधन करना अनिवार्य होता है। ऐसे में रेपो रेट से जुड़े होम और पर्सनल लोन की दरें अगली रीसेट डेट आते ही तुरंत बढ़ जाएंगी।
- MCLR से जुड़े लोन: करीब 29.6% लोन बैंक के मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) से बंधे हैं। इनमें एमएसएमई और कॉरपोरेट लोन शामिल हैं। इन पर असर थोड़ा देरी से दिखेगा, क्योंकि बैंकों द्वारा अपनी फंडिंग कॉस्ट की समीक्षा के बाद अनुबंध में तय रीसेट डेट पर ही दरें बदलेंगी।
आम जनता और नए लोन खरीदारों के लिए आगे की राह
मौजूदा समय में देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 7.25% प्रति वर्ष की शुरुआती दर पर होम लोन की पेशकश कर रहा है। हालांकि, अलग-अलग ग्राहकों की ब्याज दर और उसमें बदलाव का समय उनके लोन एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करेगा। आरबीआई गवर्नर ने साफ किया है कि फिलहाल दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में त्यौहारों के इस सीजन में घर या गाड़ी खरीदने की प्लानिंग बना रहे लोगों को अब ऊंची ब्याज दरों और भारी किस्तों के लिए तैयार रहना होगा।
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