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पाकिस्तानी हमले में झुंझुनूं का वीर सपूत शहीद, उधमपुर में तैनात थे सुरेंद्र कुमार; मां को अब तक नहीं दी शहादत की जानकारी

झुंझुनूं के एयरफोर्स के जवान पाकिस्तानी हमले शहीद हो गए हैं। वह 15 अप्रैल को ही अपने परिवार को साथ लेकर ड्यूटी पर वापस गए थे। अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनकी शहादत से पूरे गांव में गम का माहौल है।

jhunjhunu martyr surendra kumar moga- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV शहीद जवान सुरेंद्र कुमार मोगा अपने परिवार के साथ।

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के एयरफोर्स के जवान सुरेन्द्र कुमार मोगा पाकिस्तान की ओर से की गई एयर स्ट्राइक में शहीद हो गए हैं। सुरेंद्र कुमार मंडावा इलाके के मेहरादासी गांव के रहने वाले थे और उनकी पोस्टिंग उधमपुर में थी, जो जम्मू से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है। शहीद सुरेन्द्र कुमार सेना की मेडिकल यूनिट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बताया जा रहा है कि बीती रात हुए पाकिस्तानी हमले में वह वीरगति को प्राप्त हुए।

2 छोटे बच्चों और पत्नी को छोड़ गए पीछे

शहीद सुरेन्द्र कुमार अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को बिलखता छोड़ गए हैं। उनका परिवार उनके साथ ही रहता था। शहीद के एक पांच साल का बेटा और आठ साल की बेटी है।

सुबह 10 बजे सेना मुख्यालय से आई दुखद खबर

शहीद सुरेन्द्र कुमार की शहादत की सूचना आज सुबह करीब 10 बजे सेना मुख्यालय से उनके जीजा, बाजीसर निवासी जयप्रकाश को फोन पर दी गई। शहीद के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने की तिथि और समय के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। जैसे ही गांव में सुरेन्द्र कुमार की शहादत की खबर पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण शहीद के घर पर एकत्रित होने लगे और परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे हैं।

Image Source : india tvशहीद सुरेंद्र कुमार ने नया मकान बनवाया था, जिसका गृह प्रवेश हाल ही में हुआ था।

14 साल पहले सेना में हुए थे भर्ती

सुरेन्द्र कुमार का जन्म 8 सितंबर 1990 को हुआ था और वे करीब 14 साल पहले भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनके पिता शिशुपाल सिंह सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त थे, जिनका निधन हो चुका है। परिवार ने अभी तक शहीद की मां को इस दुखद खबर की जानकारी नहीं दी है।

सुरेंद्र कुमार की शहादत के बाद गांव में पसरा सन्नाटा-

इकलौते बेटे थे सुरेन्द्र कुमार

सुरेन्द्र कुमार 15 अप्रैल को ही अपने परिवार को साथ लेकर ड्यूटी पर वापस गए थे। गांव में उन्होंने नया मकान बनवाया था, जिसका गृह प्रवेश हाल ही में हुआ था। वह 29 मार्च को गांव आए थे और 15 अप्रैल को वापस ड्यूटी पर लौट गए थे। शहीद सुरेन्द्र कुमार अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनकी शहादत से पूरे गांव में गम का माहौल है।

(रिपोर्ट- अमित शर्मा)

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