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PM मोदी ने इजरायल की संसद में कहा 'Am Yisrael Chai', जानें क्या है इसका मतलब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की संसद में अपने संबोधन को 'एम यिसराइल चाई' के साथ खत्म किया। चलिए जानते हैं कि इसका मलतब क्या है।

इजरायल की संसद नेसेट में पीएम मोदी का संबोधन- India TV Hindi
Image Source : @NARENDRAMODI/ (X) इजरायल की संसद नेसेट में पीएम मोदी का संबोधन

PM Modi Am Yisrael Chai: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित करते हुए अपने ऐतिहासिक भाषण को हिब्रू नारे "एम यिसराइल चाई" (Am Yisrael Chai) के साथ समाप्त किया, जिसका अर्थ है "इजरायल के लोग जिंदा हैं।" यह नारा यहूदी इतिहास में सदियों से उत्पीड़न और चुनौतियों के बावजूद जीवटता और जीवन की अटूट भावना का प्रतीक रहा है। 

'इजरायल के साथ खड़ा है भारत'

पीएम मोदी इजरायल की संसद में अपने संबोधन के दौरान भारत-इजरायल के बीच मजबूत एकजुटता और साझेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों की निंदा की, नागरिकों की हत्या को किसी भी कारण से उचित नहीं ठहराया और कहा कि भारत इजरायल के दर्द को महसूस करता है और मजबूती से उसके साथ खड़ा है।

'जय हिंद' के साथ पीएम मोदी ने समाप्त किया भाषण

अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने "एम यिसराइल चाई" का उद्घोष किया, जिसके बाद नेसेट में खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजी, और उन्होंने 'जय हिंद' के साथ भाषण का समापन किया।

 

एम यिसराइल चाई का है ऐतिहासिक महत्व

"एम यिसराइल चाई" का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद गहरा है। यह नारा यहूदी परंपरा में जीवन के प्रति प्रेम और अटूट संकल्प को दर्शाता है। यह नारा आधुनिक रूप में 1960 के दशक में सोवियत यहूदियों के आंदोलन से लोकप्रिय हुआ, जहां इसे श्लोमो कार्लेबैक ने गाया। 7 अक्टूबर हमलों के बाद इजरायल में यह एकता और प्रतिरोध का गान बन गया।

'आतंकवाद को सही नहीं ठहरा सकते'

इजरायली संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर दुनिया को चेताया। उन्होंने कहा, "कोई भी वजह आम लोगों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकती। कोई भी चीज आतंकवाद को सही नहीं ठहरा सकती। भारत ने भी लंबे समय तक आतंकवाद का दर्द सहा है। हमें 26/11 के मुंबई हमले और इजरायली नागरिकों समेत बेगुनाहों की जान जाने की याद है। आपकी तरह, हमारी भी आतंकवाद के लिए जीरो टॉलरेंस की एक जैसी और बिना किसी समझौते वाली पॉलिसी है, जिसमें कोई डबल स्टैंडर्ड नहीं है। आतंकवाद का मकसद समाज को अस्थिर करना, विकास को रोकना और भरोसा खत्म करना है। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए लगातार और मिलकर दुनिया भर में कार्रवाई करने की जरूरत है क्योंकि कहीं भी आतंक हर जगह शांति के लिए खतरा है।"

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