India Israel Relations: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल के दौरे पर हैं। अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी ने इजरायल की संसद को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत का इजरायल की जमीन से रिश्ता खून और कुर्बानी से जुड़ा है। पहले विश्व युद्ध के दौरान 4,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने इस इलाके में अपनी जान दी थी। पीएम ने इस दौरान यह भी कहा कि यहूदी समुदाय भारत में बिना किसी जुल्म, भेदभाव या डर के रहते आए हैं। पीएम मोदी से पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संसद में कहा कि दुनिया में जहां एंटी-सेमिटिज्म बढ़ रहा है, भारत सबसे अलग दिखता है। एक ऐसी सभ्यता जहां यहूदियों को कभी परेशान नहीं किया गया, बल्कि उनका स्वागत किया। हम यह भी नहीं भूलते हैं।
भारत से है इजरायल का लगाव
पीएम नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयानें से साफ है कि भारत और इजरायल के बीच संबंध कितने गहरे हैं। भारत और इजरायल के के रिश्ते केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे गहरा ऐतिहासिक जुड़ाव, सांस्कृतिक सम्मान और रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव है। इजरायल भारत से इतना लगाव क्यों रखता है? यह सवाल कई लोगों के मन में है तो चलिए इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
हाइफा की लड़ाई में भारतीय सैनिकों का बलिदान
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1918 में Battle of Haifa में भारतीय घुड़सवार सैनिकों ने ओटोमन सेना से हाइफा शहर को मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई। उस समय हाइफा आज के इजरायल का हिस्सा है। भारतीय सेना के जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर शहर को आजाद कराया था। इजरायल आज भी इस वीरता को याद करता है। हर साल हाइफा में भारतीय सैनिकों की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। भारत के लिए भी यह गौरव का विषय है कि उसके सैनिकों की बहादुरी को विदेश में सम्मान मिलता है। यह ऐतिहासिक घटना दोनों देशों के बीच संबंधों की अटूट कड़ी है।
भारत में यहूदियों को मिला सम्मान
दुनिया के कई हिस्सों में यहूदियों को सदियों तक उत्पीड़न और भेदभाव का सामना करना पड़ा। यूरोप में तो हालात इतने भयावह थे कि Holocaust जैसी त्रासदी हुई। लेकिन भारत एक ऐसा देश रहा जहां यहूदी समुदाय को कभी भी संगठित उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ा। कोच्चि से लेकर कोलकाता तक यहूदी भारत में शांति और सम्मान के साथ रहते हैं। भारत ने उन्हें अपने समाज का हिस्सा बनाया है। यही कारण है कि इजरायल भारत को एक सच्चा मित्र मानता है।
आधिकारिक कूटनीतिक संबंध
इजरायल की स्थापना 1948 में हुई, लेकिन भारत ने 1992 में पूर्ण कूटनीतिक संबंध स्थापित किए। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते तेजी से आगे बढ़े। 2017 में पीएम नरेंद्र मोदी का इजरायल दौरा ऐतिहासिक माना गया। यह पहली बार था जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री इजरायल गया। इसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी भारत का दौरा किया। इन दौरों से साफ संदेश गया कि दोनों देश अब खुले तौर पर एक-दूसरे के साथ हैं।
रक्षा साझेदारी है अहम
इजरायल भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार है। भारत इजरायल से आधुनिक हथियार, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और निगरानी तकनीक खरीदता है। सीमा सुरक्षा और आतंकवाद से लड़ने में इजरायल का अनुभव भारत के लिए उपयोगी रहा है। दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख रखते हैं। यही साझा चिंता उन्हें और करीब लाती है। इजरायल भारत को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।
वैश्विक मंच पर समर्थन
भारत और इजरायल दोनों लोकतांत्रिक देश हैं। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने संतुलित रुख अपनाया है, लेकिन समय-समय पर इजरायल के प्रति समझदारी दिखाई है। वहीं, इजरायल भी भारत के हितों का सम्मान करता है। दोनों देशों के बीच भरोसा इस स्तर तक है कि वो कठिन परिस्थितियों में भी संवाद बनाए रखते हैं।
समाज में है जुड़ाव
भारत में यहूदी समुदाय ने बॉलीवुड, व्यापार और शिक्षा में योगदान दिया। वहीं, इजरायल में भारतीय मूल के यहूदी आज भी भारतीय संस्कृति से जुड़े हुए हैं। त्योहारों और परंपराओं में भारतीय रंग देखने को मिलता है। ऐसे में कहा जा सता है कि इजरायल का भारत के प्रति लगाव किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक कारणों से जुड़ा है।
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