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जेल जाने पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को 'हटाने' के बजाय हो 'निलंबन', संसदीय समिति ने की सिफारिश

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jul 12, 2026 05:04 pm IST,  Updated : Jul 12, 2026 05:06 pm IST

संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि जेल जाने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को 'हटाने' के बजाय 'निलंबन' होना चाहिए। जानिए संसदीय समित ने क्या-क्या सिफारिशें की हैं।

Parliamentary committee report- India TV Hindi
130वें संविधान संशोधन विधेयक की समीक्षा कर रही समिति ने अहम सिफारिश की है। Image Source : PTI

विपक्षी दलों की चिंताओं के बीच पार्लियामेंट की एक कमेटी ने सिफारिश की है कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री किसी गंभीर अपराध के आरोप में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखे जाते हैं, तो उन्हें उनके पद से हटाने की जगह निलंबित किया जाना चाहिए। कमेटी ने एक ऐसी व्यवस्था का भी प्रपोजल दिया है, जिसके अंतर्गत अगर ऐसे लोगों को आरोपों से बरी कर दिया जाता है या मुकदमे की कार्यवाही तय समयसीमा के अंदर आगे नहीं बढ़ती है, तो निलंबन खुद ही खत्म हो जाएगा।

बिल से क्यों असहमत थीं विपक्षी पार्टियां?

दरअसल, 130वें संविधान संशोधन विधेयक की समीक्षा कर रही पार्लियामेंट की ज्वाइंट कमेटी ने 2 खास और 3 सामान्य सिफारिशें कीं। अगस्त, 2025 में पेश किए गए इस बिल में यह प्रावधान था कि यदि प्रधानमंत्री, मंत्री या मुख्यमंत्री हिरासत में रहने के 31वें दिन तक खुद त्यागपत्र नहीं देते हैं, तो उन्हें स्वत: उनके पद से हटा दिया जाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इस बिल को विपक्षी पार्टियों की सरकारों को अस्थिर करने का एक माध्यम बताया था। विपक्ष के ज्यादातर दलों ने इस बिल की समीक्षा करने वाली ज्वाइंट कमेटी से दूरी बना ली थी।

'पद से हटाना' शब्द को 'निलंबन' से बदला जाए

संसदीय समिति रिपोर्ट के जल्द स्वीकृत किए जाने के आसार हैं। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में प्रपोजल दिया है कि 'पद से हटाना' शब्द को 'निलंबन' से बदला जाए, मतलब कि 'जिन मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, उन्हें कानूनी कार्यवाही का फैसला आने तक स्थायी तौर पर पद से हटाने की जगह निलंबित किया जाना चाहिए।'

उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से जुड़े मामलों की हो त्वरित सुनवाई

संसदीय समिति ने कहा कि यह सुरक्षा उपाय व्यक्ति की दोबारा नियुक्ति को सुनिश्चित करता है और यह भी ख्याल करता है कि जिन लोगों को कोर्ट दोषी नहीं पातीं, उनका निलंबन स्थायी न होने पाए। ज्वाइंट कमेटी ने यह भी सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से जुड़े केस की सुनवाई त्वरित या स्पेशल कोर्ट में होनी चाहिए।

अपराधों की स्पष्ट पहचान को लेकर भी सिफारिश

ज्वाइंट कमेटी ने ये भी कहा कि प्रस्तावित कानून में एक अलग अनुसूची होनी चाहिए जिसमें 5 वर्ष या उससे ज्यादा की सजा वाले अपराध शामिल हों, ताकि उन अपराधों की स्पष्ट पहचान हो सके, जिनकी वजह से निलंबन हो सकता है।

जेल के अंदर से ना चलाई जाए सरकार

यह बिल यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पेश किया गया था कि सरकारें जेल के अंदर से न चलाई जाएं। यदि सिफारिशें मान ली जाती हैं, तो गृह मंत्रालय प्रस्तावित संशोधनों के साथ यूनियन कैबिनेट के पास जाएगा और बाद में लोकसभा में आधिकारिक रूप से संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा।

(इनपुट- भाषा)

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