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विदेश मंत्री जयशंकर ने कतर, UAE और ईरान के नेताओं से की बात, मिडिल ईस्ट की स्थिति पर की चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार शाम कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ टेलीफोन पर बातचीत की।

 विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर- India TV Hindi
Image Source : PTI विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर

नई दिल्ली: अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार शाम को कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अपने समकक्षों के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और क्षेत्र के बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर चर्चा की।

कतर के प्रधानमंत्री के साथ चर्चा

डॉ. जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी से फोन पर संपर्क किया। दोनों नेताओं ने चल रहे संघर्ष पर टेलीफोन पर बातचीत की।

UAE के उप-प्रधानमंत्री से भी की बात

इसके साथ ही, विदेश मंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति पर चर्चा की।

ईरान के विदेश मंत्री का आया फोन

कतर और UAE के नेताओं से बात करने के तुरंत बाद, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। डॉ. जयशंकर ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमने वर्तमान स्थिति पर चर्चा की।

ट्रंप की चेतावनी से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई हालिया चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को नौवहन के लिए फिर से नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान द्वारा अवरुद्ध किए जाने के बाद तेल और गैस की कीमतों में वैश्विक स्तर पर तेजी आई है।

पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है। ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों के जहाजों को इस जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए पिछले कुछ हफ्तों में कूटनीतिक प्रयास किए हैं। भारत का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी जारी रहती है तो भारत समेत कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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