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Davos 2016: अरुण जेटली का कांग्रेस पर पलटवार, जीएसटी दर संविधान में शामिल करने की मांग बेतुकी

जेटली ने संविधान संशोधन विधेयक में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स जीएसटी की दर की सीमा तय किए जाने की मुख्य विपक्षी पार्टी की मांग को आज बेतुका करार दिया है।

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दावोस। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कांग्रेस के साथ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के मामले में गतिरोध बने होने का संकेत दिया है। जेटली ने संविधान संशोधन विधेयक में टैक्स की दर की सीमा तय किए जाने की मुख्य विपक्षी पार्टी की मांग को आज बेतुका करार दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी संवैधानिक रूप से इस शुल्क का जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा, कांग्रेस ने तीन मांगे रखी हैं जिसमें एक शुल्क को संविधान में शामिल करने की बेतुकी मांग भी है। अब क्या वे मुझे बता सकते हैं कि दुनिया में क्या कहीं भी शुल्क का जिक्र संविधान में है।

कांग्रेस की मांग व्यवहारिक नहीं

अरूण जेटली ने कहा, हर समय कहीं सूखा, बाढ़ होती है और आपको टैक्स की दर बढ़ानी पड़ती है। आपको टैक्स की दर में बदलाव के लिए भारत में सभी राज्यों के पास पहले जाना होगा। यह ऐसी चीज है जो संभव नहीं है। जेटली ने कहा कि कोई भी शुल्क अनंतकाल के लिए नहीं हो सकता। वित्त मंत्री ने कहा, जब मात्रा बढ़ती है, यह नीचे आएगा। संकट में यह ऊपर जा सकता है। और इसीलिए जब आपकी सरकार थी सीमा की धारण आपके दो वित्त मंत्रियों के जेहन में भी नहीं आई।

देश के लिए जरूरी है जीएसटी

जेटली ने एक परिचर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने कहा, अब आप विपक्ष में हैं तो बड़े बुद्धिमान हो गए हैं, स्थिति बदल गई है। आपने (पी चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान) फाइल पर जो प्रस्ताव किया था, मैं उसे स्वीकार करने को पूरी तरह तैयार हूं। हालांकि उन्होंने कहा कि जीएसटी निश्चित रूप से अस्तित्व में आने जा रहा है।

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