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Hindi News पैसा बिज़नेस घर खरीदने वालों को मोदी सरकार...

घर खरीदने वालों को मोदी सरकार ने दिया बड़ा तोहफा, निर्माणाधीन मकानों पर GST घटाकर किया 5%

जीएसटी परिषद ने रीयल एस्टेट क्षेत्र में मांग को बढ़ावा देने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं में मकानों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी है

India TV Paisa Desk
India TV Paisa Desk 25 Feb 2019, 15:14:39 IST

नई दिल्‍ली। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने रीयल एस्टेट क्षेत्र में मांग को बढ़ावा देने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं में मकानों पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी है और इसमें इनपुट टैक्‍स का लाभ खत्म करने का फैसला किया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को यहां जीएसटी परिषद की बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी। साथ ही किफायती दर के मकानों पर भी जीएसटी दर को आठ प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत करने का फैसला किया गया है। 

जीएसटी परिषद ने निर्माणाधीन और कंप्लीशन सर्टिफिकेट से पहले भवनों की बिक्री पर इनपुट टैक्‍स छूट (आईटीसी) को समाप्त करने का निर्णय भी किया है। रीयल एस्टेट बाजार में नकदी के धंधे पर अंकुश लगाने के लिए बिल्डरों को निर्माण सामग्री का एक बड़ा हिस्सा जीएसटी में पंजीकृत डीलरों से खरीदना अनिवार्य करने का भी फैसला किया गया है। रीयल एस्टेट पर जीएसटी की ये नई दरें एक अप्रैल, 2019 से लागू होंगी। 

वित्त मंत्री ने बताया कि लॉटरी पर जीएसटी के बारे में फैसला आगे के लिए टाल दिया गया है। इस बारे में प्रस्ताव पर चर्चा के लिए मंत्रियों के समूह (जीओएम) की बैठक फिर होगी। इस समय राज्य सरकारों द्वारा संचालित लॉटरी योजनाओं पर 12 प्रतिशत एवं राज्य सरकारों द्वारा अधिकृत लॉटरी पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। 

जीएसटी परिषद की 33वीं बैठक के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए जेटली ने कहा कि उपभोक्ताओं को लग रहा था कि बिल्डर इनपुट टैक्‍स पर छूट का लाभ उन्हें नहीं दे रहे थे। इसीलिए रीयल एस्टेट क्षेत्र में कर प्रणाली में बदलाव की सिफारिश के लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया गया था। 

जेटली ने कहा कि परिषद ने निर्णय किया है कि इनपुट टैक्‍स पर छूट को समाप्त करने के बाद सामान्य आवासीय परियोजनाओं के लिए पांच प्रतिशत की दर रहेगी, जबकि किफायती आवासीय परियोजनाओं के लिए यह एक प्रतिशत रहेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि इनपुट टैक्‍स पर छूट खत्म होने के बाद रीयल एस्टेट क्षेत्र का कारोबार फिर से पहले की तरह नकद लेनदेन का धंधा ना बन जाए, इसके लिए बिल्डर कंपनियों को निर्माण सामग्री का एक बहुत ऊंचा हिस्सा जीएसटी में पंजीकृत डीलरों से खरीदना अनिवार्य किया जाएगा। यह हिस्सा कितना प्रतिशत रखा जाए, यह एक समिति द्वारा तय किया जाएगा। मंत्रियों के समूह ने यह सीमा 80 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया है। 

उन्होंने कहा कि आज के फैसले से आवास निर्माण क्षेत्र को बल मिलेगा और नव-मध्यम वर्ग को अपने मकान के सपने को पूरा करने में मदद मिलेगी। इस फैसले से मकान खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। परिषद ने इसके साथ ही किफायती दर की परिभाषा को भी उदार किया है। इसके तहत महानगरों (दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई-एमएमआर और कोलकाता) में 45 लाख रुपए तक की लागत वाले और 60 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के मकानों को इस श्रेणी में रखा जाएगा। इसी तरह छोटे-मझोले शहरों में 90 वर्ग मीटर तक के मकानों को इस श्रेणी का माना जाएगा। इसके तहत महानगरों में शयनकक्ष वाले गैर-महानगरीय शहरों में संभवतः तीन कमरों वाले मकान आएंगे।

जेटली ने बताया कि जिन परियोजनाओं का निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है, उनके संबंध में नियम एवं निर्देश अधिकारियों की एक समिति तय करेगी। उन्होंने कहा कि निर्धारण समिति और विधि समिति 10 मार्च तक दिशा-निर्देशों को जीएसटी परिषद के सामने रख देगी। परिषद की बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी ताकि चुनाव के समय मंत्रियों को दिल्ली का चक्कर न लगाना पड़े।