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Hindi News पैसा बिज़नेस टाटा पावर मात्र 1 रुपए में बेचना चाहती है मूंदड़ा पावर प्रोजेक्‍ट में अपनी 51% हिस्‍सेदारी, रखी ये शर्त

टाटा पावर मात्र 1 रुपए में बेचना चाहती है मूंदड़ा पावर प्रोजेक्‍ट में अपनी 51% हिस्‍सेदारी, रखी ये शर्त

टाटा पावर ने मूंदड़ा पावर प्रोजेक्‍ट में अपनी 51 प्रतिशत हिस्‍सेदारी गुजरात जैसे राज्‍यों, जो उससे बिजली खरीदते हैं, को 1 रुपए में बेचने की पेशकश की है।

टाटा पावर मात्र 1 रुपए में बेचना चाहती है मूंदड़ा पावर प्रोजेक्‍ट में अपनी 51% हिस्‍सेदारी, रखी ये शर्त- India TV Paisa टाटा पावर मात्र 1 रुपए में बेचना चाहती है मूंदड़ा पावर प्रोजेक्‍ट में अपनी 51% हिस्‍सेदारी, रखी ये शर्त

नई दिल्‍ली। टाटा पावर ने 4,000 मेगावाट क्षमता वाले मूंदड़ा पावर प्रोजेक्‍ट में अपनी 51 प्रतिशत हिस्‍सेदारी गुजरात जैसे राज्‍यों, जो उससे बिजली खरीदते हैं, को 1 रुपए में बेचने की पेशकश की है। कंपनी ने इस कारोबार के समक्ष आ रहे वित्‍तीय संकट से निपटने के लिए यह कदम उठाया है।

पत्र की प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्र और केंद्रीय बिजली सचिव को भी भेजी गई है। सीजीपीएल के सीईओ कृष्ण कुमार शर्मा ने पत्र में कहा कि मूंदड़ा का नुकसान बढ़कर 6,457 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है, जबकि उसकी चुकता शेयर पूंजी 6,083 करोड़ रुपए थी।

उन्होंने लिखा है कि उस पर बकाया कर्ज 10,159 करोड़ रुपए है और परियोजना के व्यवहारिक नहीं होने से बैंकों और वित्‍तीय संस्थानों ने आगे कर्ज का वितरण करने से मना कर दिया है। टाटा ने फरवरी 2006 में बोली के जरिये गुजरात में 4,000 मेगावाट क्षमता के मूंदड़ा प्रोजेक्‍ट को हासिल किया था। इसके लिए उसने 2.26 रुपए प्रति यूनिट की बोली लगाई थी। इस इकाई को टाटा समूह की इंडोनेशिया में कोयला खान से आयातित कोयले के जरिये चलाया जाना था।

इंडोनेशिया सरकार ने 2010 में कहा कि कोयले का निर्यात केवल अंतरराष्ट्रीय दरों के आधार पर ही हो सकता है। इसको देखते हुए टाटा ने बिजली के लिए अधिक शुल्क की मांग की लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।

सूत्रों के अनुसार सीजीपीएल ने पत्र में कहा है कि कंपनी की वित्‍तीय स्थिति लगातार बिगड़ रही है और ऐसी स्थिति में पहुंच गई है जहां उसे काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कंपनी चाहती है कि शुल्क पर फिर से बातचीत हो या बिजली खरीदार सीजीपीएल में 51 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नाम मात्र एक रुपए में ले लें और ईंधन लागत के हिसाब से बिजली खरीद कर परियोजना को राहत दें।

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