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Hindi News पैसा बिज़नेस देश में 443 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की लागत 4.92 लाख करोड़ बढ़ी, 764 परियोजनाओं में देरी हुई

देश में 443 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की लागत 4.92 लाख करोड़ बढ़ी, 764 परियोजनाओं में देरी हुई

रिपोर्ट के अनुसार देरी वाली 764 परियोजनाओं में औसत विलम्ब 36.27 महीने का है। परियोजनाओं में देरी भूमि अधिग्रहण में विलम्ब, वन और पर्यावरण मंजूरी में देरी समेत अन्य कारणों से हुई है।

Infrastructure project - India TV Paisa Image Source : FILE इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट

देश में डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 443 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (Infrastructure projects) की लागत में फरवरी महीने में 4.92 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। आधिकारिक रिपोर्ट में यह कहा गया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार 1,902 परियोजनाओं में से 443 की लागत में वृद्धि की सूचना मिली और 764 परियोजनाओं में देरी हुई। मंत्रालय 150 करोड़ रुपये और उससे अधिक की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर नजर रखता है। 

समय पर पूरा होने से होती बड़ी बचत 

मंत्रालय की फरवरी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘1,902 परियोजनाओं के कार्यान्वयन की कुल मूल लागत 27,08,030.44 करोड़ रुपये थी। इन परियोजनाओं को पूरा करने की अनुमानित लागत 32,00,507.55 करोड़ रुपये होने की संभावना है। यह कुल लागत में 4,92,477.11 करोड़ रुपये (मूल लागत का 18.19 प्रतिशत) की वृद्धि को बताता है। रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2024 तक इन परियोजनाओं पर 16,76,739 करोड़ रुपये का खर्च आया जो परियोजनाओं की अनुमानित लागत का 52.39 प्रतिशत है। अगर परियोजनाओं के कार्यान्वयन के ताजा कार्यक्रम को देखा जाए तो जिन परियोजनाओं में देरी हुई है, उनकी संख्या कम होकर 568 रही।

इस कारण प्रोजेक्ट पूरा होने में देरी 

इसके अलावा 389 परियोजनाओं के न तो चालू होने का वर्ष और न ही उनके पूरा होने में लगने वाले समय के बारे में सूचना दी गयी है। जिन 764 परियोजनाओं में देरी हुई है, उनमें से 188 में विलम्ब एक से 12 महीने का है। वहीं 185 परियोजनाओं के मामले में देरी 13 से 24 महीने, 275 परियोजनाओं के मामले में विलम्ब 25 से 60 महीने और 116 परियोजनाओं के मामले में 60 महीने से अधिक की देरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार देरी वाली 764 परियोजनाओं में औसत विलम्ब 36.27 महीने का है। परियोजनाओं में देरी भूमि अधिग्रहण में विलम्ब, वन और पर्यावरण मंजूरी में देरी समेत अन्य कारणों से हुई है। 

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