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Pakistan के वित्त मंत्री इशाक डार का बयान, 'अल्लाह भरोसे देश की तरक्की'

Pakistan Finance Minister Ishaq Dar: देश की समृद्धि एवं विकास के लिए अल्लाह ही जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान के वित्त मंत्री का ये बयान सुर्खियों में है। उन्होंने एक उद्घाटन के दौरान ये कहा है।

Pakistan Finance Minister statement- India TV Paisa Image Source : FILE Pakistan के वित्त मंत्री इसहाक डार का बयान, 'अल्लाह भरोसे देश की तरक्की'

Pakistan Finance Minister Statement: पाकिस्तान के लोग इस समय गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वहां के लोगों को खाने के लिए रोटी और उसे बनाने के लिए LPG Gas तक नहीं मिल पा रही है। महंगाई चरम पर है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने के कगार पर आ गया है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी आगे आकर देश को तरक्की पर ले जाने के लिए काम करने की है तो वहां की सरकार अजीबो-गरीब बयान दे रही है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने कहा है कि इस्लाम के नाम पर बनाए गए इस इकलौते देश की समृद्धि एवं विकास के लिए अल्लाह ही जिम्मेदार हैं। डार ने यहां ग्रीन लाइन ट्रेन सेवा के उद्घाटन समारोह में कहा कि उन्हें पाकिस्तान की तरक्की को लेकर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि मेरे यकीन का कारण यह है कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना था। अगर अल्लाह पाकिस्तान बना सकते हैं तो वह इसकी तरक्की और विकास के साथ इसे अमीर भी बना सकते हैं।

Image Source : Fileपाकिस्तान के लोगों को खाने के लिए रोटी तक नहीं मिल रही है।

पांच साल पहले शुरू हुए 'नाटक' 

वित्त मंत्री ने कहा कि शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली सरकार पाकिस्तान की स्थिति सुधारने के लिए अपनी तरफ से पुरजोर कोशिश कर रही है। हमारी टीम चुनावों के पहले हालात को सुधारने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा बदहाली के लिए पांच साल पहले शुरू हुए 'नाटक' को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि यहां के लोगों को अब भी भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस नाटक के पहले 2013-17 के दौरान नवाज शरीफ के कार्यकाल में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अच्छी हालत में थी। 

Image Source : Fileनवाज पर लगाए आरोप

नवाज पर लगाए आरोप

नवाज के शासन में पाकिस्तान तरक्की की राह पर था, लेकिन उसे पटरी से हटा दिया गया। लोग देख सकते हैं कि पिछले पांच साल में देश को कितनी बर्बादी का सामना करना पड़ा है। विदेशी मुद्रा के अभाव में पाकिस्तान के सामने जरूरी चीजों की खरीद के लिए भी भुगतान करने लायक मुद्रा नहीं रह गई है। इस समस्या से निपटने के लिए वह अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष समेत कई संस्थानों से आर्थिक पैकेज की तलाश में है।  

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