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Hindi News पैसा बिज़नेस मणप्पुरम फाइनेंस पर चला RBI का हंटर, इस गलती के लिए लग गया 20 लाख रुपये का भारी भरकम जुर्माना

मणप्पुरम फाइनेंस पर चला RBI का हंटर, इस गलती के लिए लग गया 20 लाख रुपये का भारी भरकम जुर्माना

RBI ने शुक्रवार को कहा कि सोने के बदले कर्ज देने वाली कंपनी पर यह जुर्माना विनियामक अनुपालन में खामियों के आधार पर लगाया गया है।

RBI imposes Rs 20 lakh penalty on Manappuram Finance- India TV Paisa Image Source : FILE RBI imposes Rs 20 lakh penalty on Manappuram Finance

गोल्ड लोन प्रदान करने वाली भारत की प्रमुख गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) मणप्पुरम फाइनेंस को रिजर्व बैंक (RBI) की कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए निर्धारित नियमों के कुछ प्रावधानों का पालन नहीं करने पर मणप्पुरम फाइनेंस (Manappuram Finance) पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। नियामक ने कहा कि यह कार्रवाई कंपनी की ओर से गैरसंतोषजनक जवाब के आधार पर की गई है।

RBI ने शुक्रवार को कहा कि सोने के बदले कर्ज देने वाली कंपनी पर यह जुर्माना विनियामक अनुपालन में खामियों के आधार पर लगाया गया है। इसका इरादा ग्राहकों के साथ किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता को परिभाषित करने का नहीं है। आरबीआई ने संस्थान की मार्च, 2021 तक वित्तीय स्थिति को देखते हुए इसका वैधानिक परीक्षण किया था। इस दौरान पता चला कि मणप्पुरम फाइनेंस ने 90 दिन से ज्यादा समय से लंबित बकाये को गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत नहीं किया था। 

RBI के नियमों को न मानना इस बैंक पर पड़ा भारी

रिजर्व बैंक के नियमों की अनदेखी एक और बैंक पर भारी पड़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड, पटना (The Bihar State Co-operative Bank Limited, Patna) पर नियामकीय प्रावधानों के उल्लंघन के लिए 60.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बता दें कि RBI ने बैंकों के दिन प्रतिदिन के कामकाज को लेकर सख्त नियम बनाए हैं और रिजर्व बैंक (Reserve Bank) समय समय पर देश के निजी, सरकारी और सहकारी बैंकों के कामकाज की समीक्षा करता रहता है। इसी बीच नियमों के उल्लंघन का मामला पटना के बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड की ओर से सामने आया है। 

संदिग्ध लेनदेन का शक

आरबीआई ने बयान में कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 के बाद नाबार्ड की तरफ से किए गए निरीक्षण से इस बैंक में चल रही गड़बड़ी का पता चला है। नाबार्ड की जांच में पता चला कि यह सहकारी बैंक संदिग्ध लेनदेन को चिह्नित करने वाले सॉफ्टवेयर लगाने और उनकी जानकारी देने में नाकाम रहा था। इसके अलावा तय समय में वैधानिक सूचना भी बैंक ने नहीं दी थी। बता दें कि रिजर्व बैंक ने संदिग्ध लेनदेन की जानकारी हासिल करने के लिए बैंकों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए निर्देश जारी किए हैं, इसके तहत बैंक सॉफ्टवेयर की मदद से संदिग्ध लेनदेन की जानकारी हासिल करते हैं और फ्रॉड पर कड़ी नजर रखते हैं। 

क्रेडिट एजेंसियों को भी सूचना नहीं

रिजर्व बैंक ने अपनी कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह सहकारी बैंक चारों क्रेडिट सूचना कंपनियों को आंकड़ों का ब्योरा देने और निदेशकों की एक उपभोक्ता सेवा समिति गठित करने में भी विफल रहा। केंद्रीय बैंक ने आधिकारिक बयान में कहा कि बैंक को नोटिस जारी किया गया था और उसके जवाब को देखने के बाद यह जुर्माना लगाने का फैसला किया गया। वैसे रिजर्व बैंक की कार्रवाई झेलने वालों में सिर्फ पटना का बैंक ही एकमात्र नहीं है। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने नियामकीय अनुपालन में खामी के लिए जोवाई कोऑपरेटिव अर्बन बैंक लि., मेघालय पर भी छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

इक्विटास होल्डिंग्स ने NBFC का लाइसेंस लौटाया

इक्विटी होल्डिंग्स ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का अपना लाइसेंस रिजर्व बैंक को लौटा दिया है। इसके साथ ही एनबीएफसी के रूप में कंपनी का पंजीकरण रद्द हो गया है। रिजर्व बैंक ने सोमवार को यह जानकारी दी। केंद्रीय बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए (6) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कंपनी का पंजीकरण प्रमाणन (सीओआर) रद्द कर दिया है।

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