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Hindi News पैसा बिज़नेस सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली ग्रुप के घर खरीदारों की मांग मानी, जानिए क्या थी Demand

सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली ग्रुप के घर खरीदारों की मांग मानी, जानिए क्या थी Demand

घर खरीदारों की ओर से उपस्थित अधिवक्ता एम एल लाहोटी ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि घर खरीदारों की शिकायतों की सुनवाई के लिए एक नई पीठ के गठन की जरूरत है।

आम्रपाली ग्रुप- India TV Paisa Image Source : FILE आम्रपाली ग्रुप

सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों की मांग मानते हुए दिवालिया हो चुकी रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ घर खरीदारों की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए एक नई पीठ का गठन करेगा। गौरतलब है कि हजारों की संख्या में लोगों ने आम्रपाली में फ्लैट बुक कराया था लेकिन रियल्टी कंपनी इन्हें फ्लैट का पजेशन यानी आवंटन देने में विफल रही थी। इसके बाद घर खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अभी तक आम्रपाली समूह से जुड़े मामले की सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित की अगुवाई वाली पीठ कर रही थी। न्यायमूर्ति ललित आठ नवंबर को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद घर खरीदारों ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला की पीठ से घर खरीदारों के वकील ने एक नई पीठ के गठन का आग्रह किया। इस मांग को मांगते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मैं एक नई पीठ का गठन करूंगा।’’

नई पीठ के गठन की जरूरत

घर खरीदारों की ओर से उपस्थित अधिवक्ता एम एल लाहोटी ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि घर खरीदारों की शिकायतों की सुनवाई के लिए एक नई पीठ के गठन की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने 23 जुलाई, 2019 को समय पर आवंटन नहीं करने वाले बिल्डरों के खिलाफ कदम उठाते हुए रियल एस्टेट कानून रेरा के तहत आम्रपाली समूह का पंजीकरण रद्द करने का आदेश दिया था। न्यायालय ने रियल्टी कंपनियों द्वारा कथित धन शोधन की प्रवर्तन निदेशालय से जांच का भी निर्देश दिया था। इस फैसले से आम्रपाली समूह के करीब 42,000 घर खरीदारों को राहत मिली थी। 

ग्रुप के खिलाफ चल रही है जांच

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 23 जुलाई, 2019 के फैसले में घर खरीदारों द्वारा दोहराए गए विश्वास को भंग करने के लिए दोषी बिल्डरों पर नकेल कस दी थी और रेरा के तहत आम्रपाली ग्रुप के पंजीकरण को रद्द करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को रियल्टी द्वारा कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का निर्देश दिया था, जिससे आम्रपाली ग्रुप के 42,000 से ज्यादा घर खरीदारों को फैसले से राहत मिली थी। 

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