हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार रेड जोन में कारोबार करते हुए देखा गया। सेंसेक्स 229 अंक टूटकर 60,628 अंक पर अपना बिजनेस बंद किया तो वहीं निफ्टी 86 प्वाइंट की गिरावट के साथ 18,972 अंको पर जा पहुंची।
Image Source : BSEबाजार बंद होते-होते निवेशकों के डूबे करोंड़ों रूपये
सुबह से ही मार्केट में जारी है गिरावट
बता दें, आज सुबह में शेयर बाजार लाल निशान में खुला था। सेंसेक्स 43.88 अंक टूटकर 60,814.55 पर तथा निफ्टी 24.40 अंक गिरकर 18,083.45 अंक पर कारोबार शुरू किया। वैश्विक बाजार में भी सुस्त रफ्तार देखने को मिली है। मंदी की आशंका से अमेरिकी बाजार लगातार तीसरे दिन लुढ़ककर बंद हुआ। इसका भी असर आज भारतीय बाजार पर देखने को मिला है। आपको बता दें कि गुरुवार को हाउ जोन्स 252 अंक टूटकर बंद हुआ है। आज निवेशकों की नजर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर रहेगी। आज रिलायंस इंडस्ट्रीज के तिमाही रिजल्ट आएंगे। सेंसेक्स में शामिल 30 में 19 शेयरों में तेजी और 11 में गिरावट देखने को मिल रही है। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, आईटी और एफएमसीजी के शेयरों में गिरावट है।
बजट से पहले आप ऐसे बना सकते हैं पैसा
अगर आप शेयर बाजार निवेशक हैं तो आपके पास जनवरी महीने में कमाई का शानदार मौका है। दरअसल, आंकड़ों से पता चला है कि पिछले 10 बजटों में से अंतिम छह में बजट पेश करने से पहले के महीने में बाजार में शानदार तेजी रही। बाजार के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 में बजट के एक महीने की दौड़ में बीएसई सेंसेक्स में 7.5 प्रतिशत की तेजी से सुधार हुआ। बीएसई सेंसेक्स ने 2017 और 2018 के केंद्रीय बजट से पहले के महीने में अच्छा प्रदर्शन किया, आंकड़ों के अनुसार 5.7 प्रतिशत और 6.2 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। इसी तरह, बेंचमार्क 2021 में 1.5 प्रतिशत और 2019 में 0.6 प्रतिशत बढ़ा। 2022 में बीएसई बेंचमार्क 4.4 फीसदी चढ़ा था।
इन बजट से पहले गिरावट देखी गई
वहीं, अगर गिरावट वाले सालों की बात करें तो 2013 में बेंचमार्क सेंसेक्स 6.2 फीसदी गिरा था, जबकि 2012 में इसमें 3.8 फीसदी की गिरावट आई थी। 2020 में भी इसमें 3.8 फीसदी की गिरावट आई थी। 2014 में, बेंचमार्क 0.8 प्रतिशत और 2015 में 0.7 प्रतिशत नीचे था। 2023-24 के केंद्रीय बजट में कुछ ही दिन दूर हैं, ऐसी संभावना है कि यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण बीएसई बेंचमार्क में अस्थिरता हो सकती है। साथ ही चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भू-राजनीतिक स्थिति अभी भी अस्थिर है, बजट की दौड़ में बाजार तेजी के रुझान दिखा सकते हैं। इस परिदृश्य में यह देखने की जरूरत है कि इस महीने के दौरान समग्र रुझान कैसा रहता है।
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