Open- ended vs Close ended Mutual Fund: एएमसी कंपनियों की ओर से म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए निवेशकों को कई सारे विकल्प दिए जाते हैं। इसमें से ही एक है ओपन-एंडेड और क्लेज-एंडेड म्यूचुअल फंड है। इन दोनों ही प्रकार के म्यूचुअल फंड में रिस्क, लिक्विडिटी आदि के आधार पर बड़ा अंतर होता है आइए जानते हैं।
क्या होते हैं ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड?
ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड उन फंड्स को कहते हैं जिनमें शेयरों के ट्रांसफर पर किसी प्रकार की कोई रोक नहीं होती है। इस प्रकार के म्यूचुअल फंड में पूरे साल के दौरान आप कभी भी पैसा निवेश या निकाल सकते हैं। इस वजह से ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड में अधिक लिक्विडिटी निवेशकों को मिलती है। ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड में एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) दिन के अंत में समायोजित की जाती है। ज्यादातर ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड में कोई मैच्योरिटी पीरियड नहीं होता है। हालांकि, ईएलएसएस में 3 वर्ष का लॉक इन पीरियड होता है।
क्या होते हैं क्लोज- एंडेड म्यूचुअल फंड?
क्लोज- एंडेड म्यूचुअल फंड, वे फंड्स होते हैं जिसमें यूनिट्स फिक्स होते हैं। एनएफओ के दौरान इनकी संख्या तय की जाती है। इसके बाद कोई नई यूनिट्स नहीं खरीदी जा सकती है। क्लोज- एंडेड म्यूचुअल फंड का फिक्स एक लॉक-इन पीरियड होता है। इन फंड्स को शेयर मार्केट में लिस्ट किया जाता है, जिसके बाद निवेशक इनमें ट्रेड कर सकते हैं।
ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड vs क्लोज- एंडेड म्यूचुअल फंड
- ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड में आप कभी भी निवेश और निकाल सकते हैं। वहीं, क्लोज- एंडेड म्यूचुअल फंड में एक निश्चित अवधि के बाद ही निवेश को निकाला जा सकता है।
- ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड एसआईपी के जरिए निवेश कर सकते हैं। लेकिन क्लोज- एंडेड म्यूचुअल फंड में लंपसम के जरिए ही निवेश कर सकते हैं।
- ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस रेश्यो अधिक होता है। वहीं, क्लोज- एंडेड म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस रेश्यो कम होता है।
- ओपन- एंडेड म्यूचुअल फंड में आप ट्रेडिंग नहीं कर सकते हैं। वहीं, क्लोज- एंडेड म्यूचुअल फंड में आप आसानी से ट्रेडिंग कर सकते हैं।
किसमें निवेश करना है अधिक फायदेमंद?
दोनों प्रकार के म्यूचुअल फंड में रिस्क, लिक्विडिटी और एक्सपेंस रेश्यो के आधार पर बड़ा अंतर है। निवेशक अपनी रिस्क प्रोफाइल और जरूरतों के मुताबिक किसी स्कीम का चुनाव कर सकते हैं।
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