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जुलाई के दौरान औद्योगिक उत्पादन में 10.4 फीसदी की गिरावट दर्ज

जुलाई के दौरान देश के औद्योगिक उत्पादन में लगातार पांचवे महीने गिरावट देखने को मिली है। आज जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के दौरान इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानि आईआईपी में 10.4 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। जून के दौरान इसमें 16.6 फीसदी की गिरावट थी।

<p>औद्योगिक उत्पादन में...- India TV Paisa Image Source : GOOGLE औद्योगिक उत्पादन में 10.4 फीसदी की गिरावट

नई दिल्ली। जुलाई के दौरान देश के औद्योगिक उत्पादन में लगातार पांचवे महीने गिरावट देखने को मिली है। हालांकि औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में सुधार का रुख देखने को मिल रहा है।। आज जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के दौरान इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानि आईआईपी में 10.4 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। पिछले साल जुलाई में आईआईपी में 4.9 फीसदी की बढ़त देखने को मिली थी। वहीं इससे पिछले महीने यानि जून के दौरान इसमें 16.6 फीसदी की गिरावट थी। मई में आईआईपी 33.8 फीसदी और अप्रैल में रिकॉर्ड 57.6 फीसदी गिरी थी। 

आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के उत्पादन में 11.1 प्रतिशत की गिरावट रही। इसी तरह खनन क्षेत्र का उत्पादन 13 प्रतिशत तथा बिजली क्षेत्र का उत्पादन 2.5 प्रतिशत घटा। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों तथा देशभर में लॉकडाउन की वजह से कई औद्योगिक क्षेत्र में  कंपनियां मार्च अंत से कामकाज नहीं कर पाये हैं।’’ बयान में कहा गया है कि इससे लॉकडाउन के दौरान इन प्रतिष्ठानों का उत्पादन प्रभावित हुआ। बाद में अंकुशों को हटाए जाने के बाद औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं। जुलाई 2020 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 118.1 अंक रहा। जबकि इससे पहले अप्रैल, मई और जून 2020 में यह क्रमश: 54, 89.5 और 108.9 अंक रहा था। 

वित्त वर्ष में अब तक यानि अप्रैल से जुलाई के बीच औद्योगिक उत्पादन 29.2 फीसदी घटा है। एक साल पहले इसी अवधि में औद्योगिक उत्पादन में 3.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली थी। रेटिंग एजेंसी इकरा के मुताबिक जुलाई के दौरान कारोबारी गतिविधियों में सुधार देखने को मिला है, हालांकि इस दौरान सर्विस सेक्टर में सुस्ती बनी हुई है। एजेंसी के मुताबिक जीएसटी ई-वे बिल, रेल माल ढुलाई, पोर्ट कार्गो ट्रैफिक, घरेलू एयरलाइंस का ट्रैफिक और पेट्रोल और एटीएफ की खपत आदि से सुधार के संकेत हैं। 

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